पूर्व प्रांतीय प्रवक्ता ने लगाया शिक्षा विभाग पर आरोप राजकीय शिक्षक संघ..

उत्तराखंड

पूर्व प्रांतीय प्रवक्ता ने लगाया शिक्षा विभाग पर आरोप..

चार वर्ष पूर्व पहले निकाली जानी थी प्रोन्नति सूची..

रिटायर हो चुके शिक्षक प्रोन्नति से रह गये वंचित..

रुद्रप्रयाग:  राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रान्तीय प्रवक्ता कालिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जो 347 प्रधानाध्यापकों की प्रोन्नति सूची निकाली गई है, वह चार वर्ष पूर्व पहले निकाली जानी चाहिए थी, मगर विभाग ने उन शिक्षकों के साथ अन्याय किया है। जो बिना प्रोन्नति पाये ही सेवानिवृत्त हो गये। यहां जारी विज्ञप्ति में श्री सेमवाल ने कहा कि सैकडों शिक्षक विभाग की गलत नीति का शिकार हुये हैं और पूरे सेवाकाल में बिना कोई प्रोन्नति पाये रिटायर हो गये हैं, जो भी अधिकारी इस साजिश में शामिल हैं, उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही होनी चाहिए। सेमवाल ने कहा कि आज शिक्षा विभाग में अधिकारियों की फौज है और सरकारी शिक्षा में ह्रास हो रहा है।

 

दिन प्रतिदिन सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या कम हो रही है। इसका कारण शिक्षा विभाग के अधिकारी हैं, जो शिक्षा, शिक्षक और छात्र के प्रति जरा भी गम्भीर नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चार सालों से शिक्षकों की सीआर मांगी जाती रही और तीन से चार बार सीआर देने के बाद भी शिक्षक को प्रोन्नति न देना, उनके साथ घिनौना मजाक करने जैसा है। पूर्व प्रान्तीय प्रवक्ता ने कहा कि प्रत्येक शिक्षक प्रोन्नति की आस लगाये रहता है, लेकिन अधिकारियों द्वारा अनावश्यक रुप से हीलाहवाली करके मामले को लटकाया जाता है।

 

उन्होंने यह भी बताया कि साढे़ तीन दशक की सेवा की, मगर पूरे सेवा काल में एक भी प्रोन्नति नहीं हुई और हमेशा समर्पित भाव से शिक्षण कार्य किया तथा पूरे सेवाकाल में परीक्षा फल शतप्रतिशत रहा। बावजूद इसके एक भी प्रोन्नति नहीं पाई। ऐसे सैकडों शिक्षक हैं, जो विभाग की गलत नीति के शिकार हुये हैं और प्रोन्नति से वंचित रहे हैं। सेमवाल ने नये निदेशक जौनसारी को बधाई दी कि उन्होंने पद ग्रहण करते ही प्रधानाध्यापक की सूची निर्गत करके सराहनीय कार्य किया है। सभी प्रोन्नत हेडमास्टरों को बधाई दी है। साथ ही जो शिक्षक विगत चार सालों में बिना प्रोन्नति पाये रिटायर हुये हैं। कहा कि वे इस अन्याय के संबंध में शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री को भी अवगत करायेंगे कि किस तरह शिक्षकों का शोषण विभाग कर रहा है।


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