उत्तराखंड

सीसीएल नियमों में बड़ा बदलाव, अब 5 से 120 दिन तक ही मिलेगा बाल्य देखभाल अवकाश..

सीसीएल नियमों में बड़ा बदलाव, अब 5 से 120 दिन तक ही मिलेगा बाल्य देखभाल अवकाश..

 

 

 

उत्तराखंड: राज्य सरकार ने महिला सरकारी कर्मचारियों और एकल अभिभावकों को मिलने वाले बाल्य देखभाल अवकाश (सीसीएल) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब एक बार में पांच दिन से कम तथा 120 दिन से अधिक का बाल्य देखभाल अवकाश स्वीकृत नहीं किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य अवकाश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। शासन स्तर से जारी संशोधित आदेश में सीसीएल स्वीकृति प्रक्रिया को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले इस अवकाश को मंजूरी देने का अधिकार नियुक्ति प्राधिकारी के पास होता था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी सक्षम प्राधिकारी को सौंप दी गई है। वही अधिकारी अब बाल्य देखभाल अवकाश की अनुमति देंगे जो उपार्जित अवकाश स्वीकृत करने के लिए अधिकृत हैं।

सरकार के अनुसार यह फैसला कर्मचारियों को समय पर अवकाश उपलब्ध कराने और अनावश्यक प्रशासनिक देरी को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अवकाश आवेदन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और त्वरित होने की उम्मीद जताई जा रही है। संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार की महिला कर्मचारियों तथा एकल अभिभावकों, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं, को पूरे सेवाकाल में अधिकतम दो वर्ष तक का बाल्य देखभाल अवकाश दिए जाने का प्रावधान पहले की तरह जारी रहेगा। हालांकि यह अवकाश निर्धारित शर्तों और नियमों के अधीन ही स्वीकृत किया जाएगा।

शासनादेश के अनुसार बाल्य देखभाल अवकाश को उपार्जित अवकाश की तरह माना जाएगा। इस दौरान पड़ने वाले सभी सार्वजनिक अवकाश भी सीसीएल अवधि में शामिल किए जाएंगे। यानी अवकाश के बीच आने वाली छुट्टियों को अलग से नहीं गिना जाएगा। सरकारी कर्मचारियों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई कर्मचारी संगठनों का मानना है कि सक्षम प्राधिकारी को अधिकार मिलने से प्रक्रिया में तेजी आएगी, जबकि कुछ कर्मचारियों का कहना है कि न्यूनतम और अधिकतम अवधि तय होने से लचीलेपन में कमी आ सकती है। फिलहाल शासन ने सभी विभागों को संशोधित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

 

 

 

 

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