उत्तराखंड

पीएम निधि से उत्तराखंड को मिलेंगी 4 एमआरआई और 5 डिजिटल मैमोग्राफी मशीनें..

पीएम निधि से उत्तराखंड को मिलेंगी 4 एमआरआई और 5 डिजिटल मैमोग्राफी मशीनें..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार और भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के बीच हुए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत प्रदेश को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इन उपकरणों के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाओं का विस्तार होगा और विशेष रूप से पर्वतीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। राज्य सरकार लंबे समय से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। हालांकि भौगोलिक परिस्थितियां, सीमित संसाधन, कठिन पर्वतीय क्षेत्र और हर वर्ष बड़ी संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बना रहता है। ऐसे में आधुनिक तकनीक से लैस चिकित्सा उपकरण प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएंगे।

सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के बीच इस महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। उत्तराखंड शासन की ओर से स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय तथा भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव आराधना पटनायक की उपस्थिति में यह समझौता संपन्न हुआ। सरकार का उद्देश्य आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में जांच सुविधाओं को मजबूत करना और मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। एमओयू के तहत प्रधानमंत्री निधि के माध्यम से उत्तराखंड को कुल 4 एमआरआई (MRI) मशीनें, 5 डिजिटल मैमोग्राफी (DBT) मशीनें और 75 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इन उपकरणों के सरकारी अस्पतालों में स्थापित होने के बाद मरीजों को कई प्रकार की जांचों के लिए निजी संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार शुरू करने में भी आसानी होगी।

पर्वतीय क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ..

उत्तराखंड के अधिकांश जिले पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां आधुनिक जांच सुविधाएं अभी भी सीमित हैं। कई बार मरीजों को सामान्य एक्स-रे या एमआरआई जांच के लिए जिला मुख्यालय अथवा बड़े शहरों तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। नई योजना के तहत मिलने वाली 75 एआई-सक्षम पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती हैं। इन मशीनों की मदद से स्वास्थ्य कर्मी दूरस्थ गांवों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और मोबाइल चिकित्सा इकाइयों के माध्यम से मरीजों की मौके पर ही जांच कर सकेंगे। इससे गंभीर मरीजों की जल्द पहचान होगी और उन्हें समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा। राज्य को मिलने वाली 5 डिजिटल मैमोग्राफी मशीनें महिलाओं में स्तन संबंधी बीमारियों, विशेषकर स्तन कैंसर की शुरुआती जांच को अधिक प्रभावी बनाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच होने से गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है, जिससे उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है। वहीं नई एमआरआई मशीनों के उपलब्ध होने से न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ट्रॉमा, स्पाइन और अन्य जटिल रोगों के निदान में भी तेजी आएगी।

अत्याधुनिक उपकरण मिलने के बाद प्रदेश के सरकारी अस्पतालों की डायग्नोस्टिक क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। मरीजों को पहले की तुलना में अधिक तेजी से जांच रिपोर्ट उपलब्ध हो सकेगी और चिकित्सकों को उपचार संबंधी निर्णय लेने में भी सुविधा मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक आधारित जांच व्यवस्था विकसित होने से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर लोगों का भरोसा और मजबूत होगा तथा निजी अस्पतालों पर निर्भरता भी कम हो सकती है। स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पांडेय ने कहा कि भारत सरकार के साथ हुए इस समझौते से उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को नई तकनीकी मजबूती मिलेगी। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के माध्यम से मरीजों की समय पर जांच, सटीक निदान और गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से प्रधानमंत्री निधि के अंतर्गत मिलने वाली 75 एआई आधारित पोर्टेबल हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें राज्य के पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगी। इनसे उन इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर स्वास्थ्य जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जहां अब तक आधुनिक उपकरणों की पहुंच सीमित रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी बदलाव की दिशा में बड़ा कदम..

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। आधुनिक जांच उपकरणों की उपलब्धता से न केवल मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी। आने वाले समय में इन सुविधाओं का लाभ प्रदेश के लाखों नागरिकों के साथ-साथ चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को भी मिल सकेगा।

 

 

 

 

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