चारधाम यात्रा- गृह मंत्रालय के निर्देश पर 10 अप्रैल को आपदा मॉकड्रिल, तैयारियां तेज..
उत्तराखंड: आगामी चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में 10 अप्रैल को राज्य के सात जिलों में एक बड़ी मॉकड्रिल आयोजित की जाएगी, जिसके जरिए आपदा से निपटने की तैयारियों को परखा जाएगा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने अधिकारियों को मॉकड्रिल को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अहम यात्रा है, जिसके मद्देनजर सभी विभागों ने सीएम पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में बेहतर तैयारियां की हैं। आपदा प्रबंधन विभाग भी पूरी तरह सतर्क है।
उन्होंने कहा कि इस मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य सभी संबंधित विभागों और हितधारकों को एक मंच पर लाकर आपात स्थिति में उनकी प्रतिक्रिया क्षमता, समन्वय और संसाधन प्रबंधन का परीक्षण करना है। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी संकट की स्थिति में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो सके। यह मॉकड्रिल राज्य के सात प्रमुख जिलों उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, टिहरी, पौड़ी और देहरादून में आयोजित की जाएगी। मेजर जनरल सुधीर बहल ने जानकारी दी कि यह अभ्यास घटना प्रतिक्रिया प्रणाली (IRS) के तहत संचालित किया जाएगा, जिससे आपदा के समय त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान संभावित जोखिमों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए रिसोर्स और रिस्क मैपिंग बेहद जरूरी है। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कौन-कौन से संसाधन कहां उपलब्ध हैं और किन क्षेत्रों में अधिक खतरा है। जीआईएस मैपिंग के जरिए इन सभी जानकारियों को सटीक रूप से चिह्नित किया जाएगा, ताकि आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। सुधीर बहल ने यह भी निर्देश दिए कि यात्रा मार्ग पर स्थित होटल और धर्मशालाओं की क्षमता का आंकलन किया जाए, जिससे आवश्यकता पड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका जा सके। इसके साथ ही यात्रियों को मौसम संबंधी अलर्ट समय-समय पर उपलब्ध कराना, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की जानकारी देना और सुरक्षित यात्रा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करना भी अनिवार्य होगा।
उन्होंने विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान देने को कहा जहां संचार सुविधाएं सीमित या उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे स्थानों पर वैकल्पिक संचार व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिसमें सैटेलाइट आधारित सिस्टम भी शामिल हो सकते हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सूचना का आदान-प्रदान बाधित न हो। यह मॉकड्रिल चारधाम यात्रा के दौरान संभावित आपदाओं से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जा सकेगा।