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बड़ा सवाल- रात में कोरोना कर्फ्यू हैं जरुरी, तो दिन में चुनावी रैलियों की क्या हैं मजबूरी?

बड़ा सवाल- रात में कोरोना कर्फ्यू हैं जरुरी, तो दिन में चुनावी रैलियों की क्या हैं मजबूरी?

 

 

कोरोना के नए वैरियंट की रफ्तार ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसको देखते हुए लगभग सभी राज्य सरकारों ने अपने अपने राज्यों में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला लिया है।

 

 

देश-विदेश: देश में कोरोना महामारी फिर से पैर पसार रही है, ओमिक्रोन के बढ़ते मामलों ने राज्यों को नाइट कर्फ़्यू लगाने पर मजबूर कर दिया है, जिसके मद्देनज़र तमाम पाबंदिया भी लगा दी गई हैं, लेकिन सवाल यह है कि रैलियों में इकट्ठा होती भीड़ में क्या कोरोना नहीं पनप सकता? कोरोना के नए वैरियंट की रफ्तार ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है, जिसको देखते हुए लगभग सभी राज्य सरकारों ने अपने अपने राज्यों में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला लिया है।

 

भारत में ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। देश में ओमिक्रॉन के केस मिलने का रिकॉर्ड टूट गया है। दिल्ली से लेकर देहरादून तक, हरियाणा से लेकर कर्नाटक तक, सिर्फ एक जैसी बात। एक जैसा सवाल। दिल्ली में कोरोना के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई और पिछले 24 घंटों में 496 संक्रमित मिले। दिल्ली में साढ़े 6 महीने बाद सबसे ज्यादा नए केस में 50% बढ़ोतरी हो गई। वही मुंबई में कोरोना के नए मामलों में बड़ा उछाल दर्ज आया है।

 

दिन के खतरे पर बड़ा फैसला नहीं..

ये सारे सवाल इसलिए हैं क्योंकि दिन के वक्त अभी ज्यादा पाबंदी नहीं है। रैली में नेताओं के भाषण सुनने लोग आते हैं तो क्या कोरोना वहां नहीं है। बाजार में सुबह शाम पैर रखने की जगह नहीं। क्या तब कोरोना संक्रमण का खतरा नहीं। जबकि सबसे ज्यादा भीड़ तो नेताओं की रैलियों में देखने को मिल रही हैं। क्या तब कोरोना का खतरा नहीं हैं। बावजूद इसके भी अभी तक दिन के खतरे पर कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ।

 

 

 

कोरोना के केस बढ़ते हैं तो सरकार के पास सबसे पहला और सरल ऑप्शन नाइट कर्फ्यू का होता है। इसलिए रात की पाबंदी शुरू हो जाती है। मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर ये वो राज्य हैं जहां फिलहाल नाइट कर्फ्यू लगा है। आने वाले वक्त में ये लिस्ट और लंबी हो सकती हैं।

 

आपको बता दे कि नाइट कर्फ्यू में रात 8 बजे, 10 बजे या 11 बजे से सुबह 5 या 6 बजे तक लोगों के बाहर जाने पर पाबंदी होती है। जिसका कारण ये है कि बेवजह भीड़ इकट्टी ना हो। सरकारों को लगता है कि इससे कोरोना केसेस की संख्या में कमी आ सकती है। लेकिन जब इससे हालात काबू नहीं हो पाते तो फिर लॉकडाउन लगाना पड़ता हैं।

 

हालांकि इस बार भी यही पैटर्न फॉलो हो रहा है, लेकिन दिन में भीड़ दिखाई दे रही है। रैली में लोग जुट रहे हैं तो इस पर भी कुछ लोग अपनी अलग-अलग राय दे रहे हैं। कुछ का मानना है कि सरकार सिचुएशन के हिसाब से फैसला कर रही है। कहने को तो केंद्र सरकार और राज्य सरकारें कोरोना को लेकर गंभीर दिख रही हैं।

 

लेकिन चुनावीं रैलियों में दिख रहा लोगों का हुजूम सभी नियमों पर सरकारी गंभीरता की धज्जियां उड़ा रहा है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली हों या फिर अन्य नेताओ की रैली सभी रैलियों में जनता बिना मास्क लगाए दिख ही जाती हैं।

 

 

 

 

 

 

 

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