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उत्तराखंड

हर बच्चे को असुरक्षित स्पर्श की जानकारी होनी जरूरी: कौर..

हर बच्चे को असुरक्षित स्पर्श की जानकारी होनी जरूरी: कौर..

लैंगिक अपराधों के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन..

प्रशिक्षण के पहले दिन 284 कर्मचारी एवं शिक्षकों को दिया गया प्रशिक्षण..

 

 

 

 

 

 

रुद्रप्रयाग। लैंगिक अपराधों के प्रति जागरुकता लाने के उद्देश्य से विकासखंड अगस्त्यमुनि सभागार में प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। बाल यौन शोषण और बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा पर मुंबई की संस्था अर्पण की ओर से जनपद के 776 विद्यालयों के दो हजार से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

समाज कल्याण विभाग के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी मनविंदर कौर ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए कहा कि वर्तमान परिवेश में बाल यौन संबंधित शिक्षा अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि हर बच्चे को सुरक्षित व असुरक्षित स्पर्श की जानकारी होने के साथ ही उनमें आत्मविश्वास का होना भी आवश्यक है। कहा कि अधिकांश बच्चे शिक्षा के प्रारंभिक दौर में शिक्षकों से बेहद प्रेरित होते हैं।

ऐसे में शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने दिए जा रहे प्रशिक्षण के लिए शुभकामनाएं दी। साथ ही आशा व्यक्त करते हुए प्रशिक्षण का अवश्य ही लाभ मिलेगा। समाज कल्याण अधिकारी सुनीता अरोड़ा ने बताया कि सरकार की प्रोजेक्ट कवज योजना के तहत जनपद के तीनों विकास खंडों में चयनित संस्था अर्पण द्वारा 19 अक्टूबर तक बाल यौन शोषण और बच्चों की व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के पहले दिन विकास खंड अगस्त्यमुनि सभागार में 130 तथा महाविद्यालय अगस्त्यमुनि में 154 शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया।

अर्पण संस्था की प्रशिक्षक श्रद्धा जाधव मोलिसा ने बाल अधिकारों सहित बाल लैंगिंक शोषण व व्यक्तिगत सुरक्षा कार्यक्रम की समझ पर प्रशिक्षण के दौरान उपस्थित शिक्षकों का प्री टेस्ट लिया। इसके साथ ही बाल यौन शोषण को पहचानने के लिए व्यवहारिक, मानसिक, शारीरिक आदि संकेतों सहित अन्य विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि दुखी विवाहित परिवार, व्यस्कों से अधिक डरने वाले, बहुत अधिक व्यस्त रहने वाले माता-पिता, बिना माता-पिता की देखभाल वाले, मानसिक व शारीरिक रूप से विकलांग, आर्थिक स्थिरता व घरेलू हिंसा वाले बच्चों की लैंगिंक शोषण के अधिक शिकार होने की संभावना होती है। ऐसे में हम सभी को जागरुक होते हुए यौन शिक्षा पर फोकस करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन सेवायोजन विभाग के अनुदेशक किशन सिंह रावत द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्य शिक्षा अधिकारी नागेंद्र बत्र्वाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी शैली प्रजापति, खंड विकास अधिकारी प्रवीन भट्ट सहित विभिन्न विद्यालयों से आए बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।

 

 

 

 

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