नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ का कहर, 165 लोगों की मौत, कई विदेशी नागरिक भी लापता..
उत्तराखंड: नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई है। रासुवागढ़ी और ग्यिरोंग क्षेत्र में बाढ़ के साथ आए मलबे ने सड़क, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। आपदा के बाद से राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार अब तक 165 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोगों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। सबसे बड़ी चिंता अभी भी लापता लोगों को लेकर बनी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक नेपाल और तिब्बत के प्रभावित क्षेत्रों में करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक राहत दलों की पहुंच चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, ऐसे में हेलीकॉप्टरों के जरिए प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाने का काम किया जा रहा है।
बढ़ सकती है मृतकों की संख्या
नेपाल पुलिस ने आशंका जताई है कि तलाशी अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। बाढ़ और मलबे के कारण कई इलाके अब भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, जिसके चलते राहत एवं खोज अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। यह क्षेत्र काठमांडू और ल्हासा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। यहां पर्यटकों के अलावा ट्रेकिंग और धार्मिक यात्राओं के लिए आने वाले लोगों की भी आवाजाही रहती है। ऐसे में लापता विदेशी नागरिकों को लेकर भी संबंधित देशों की एजेंसियां जानकारी जुटा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार लापता लोगों में भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा सहित कई देशों के नागरिक होने की जानकारी सामने आई है। वहीं चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने भी तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। आपदा के बाद सामने आए वीडियो में सीमावर्ती इलाकों में पानी और मलबे की तेज धार दिखाई दे रही है। बहाव इतना शक्तिशाली था कि कई वाहन और लोग इसकी चपेट में आ गए। नेपाल के प्रभावित इलाकों में कई घरों के साथ सड़कें और बिजली से जुड़ी परियोजनाएं भी क्षतिग्रस्त हुई हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई तबाही की कहानी
बाढ़ से बच निकले लोगों ने हादसे के दौरान के भयावह हालात बताए हैं। एक बुजुर्ग ने बताया कि अचानक उनकी ओर मलबे का तेज बहाव आया। उन्होंने अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश की और उसे छत की ओर ले जाने का प्रयास किया, लेकिन मलबे की धारा उन्हें अपने साथ बहा ले गई। बाद में हेलीकॉप्टर की मदद से बुजुर्ग को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि तेज बहाव के बीच उसने एक पेड़ को पकड़कर अपनी जान बचाई। उसकी आंखों के सामने वह मकान मलबे में तब्दील हो गया, जहां वह काम करता था। नेपाल में शुरुआती जांच के दौरान अधिकारियों ने ग्लेशियर के निचले हिस्से के टूटने या ढहने को अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव की संभावित वजह माना है। शुरुआती स्तर पर घटना को भूकंपीय गतिविधि से जोड़कर भी देखा गया था। हालांकि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार दर्ज की गई हलचल संभवतः ग्लेशियर से जुड़ी चट्टानों और बर्फ के खिसकने से उत्पन्न हुई हो सकती है। उधर, चीन के अधिकारियों ने ग्यिरोंग क्षेत्र में एक झील से जुड़े संभावित खतरे को लेकर भी निगरानी बढ़ाई है। यह झील नेपाल-तिब्बत सीमा क्रॉसिंग के ऊपरी हिस्से में स्थित बताई गई है। किसी नए भूस्खलन या जलस्तर में बदलाव की स्थिति में बचाव अभियान और जटिल हो सकता है। फिलहाल दोनों देशों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में खोज और राहत अभियान चला रही हैं। लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना प्रशासन की प्राथमिकता बनी हुई है।