उत्तराखंड

पॉलीहाउस योजना की धीमी रफ्तार पर सरकार सख्त..

पॉलीहाउस योजना की धीमी रफ्तार पर सरकार सख्त..

कार्यदायी संस्था से होगी रिकवरी..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में किसानों को संरक्षित खेती से जोड़ने और उद्यान क्षेत्र को नई दिशा देने के उद्देश्य से शुरू की गई पॉलीहाउस योजना की रफ्तार बढ़ाने के लिए सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है। करीब दो साल से अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही योजना में अब कार्यदायी संस्था की भूमिका खत्म करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही संस्था को पहले किए गए भुगतान की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू करने की तैयारी है। नाबार्ड की आरआईडीएफ योजना के तहत प्रदेश में क्लस्टर आधारित छोटे पॉलीहाउस तैयार किए जाने थे। इसके लिए सरकार ने 551.05 करोड़ रुपये की धनराशि मंजूर की थी। योजना के तहत करीब 22 हजार पॉलीहाउस स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था। इसका मकसद किसानों को नियंत्रित वातावरण में खेती की सुविधा उपलब्ध कराकर उत्पादन बढ़ाना और उद्यान क्षेत्र में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देना था।

योजना को जमीन पर उतारने के लिए करीब दो साल पहले ब्रेथवेट एंड कंपनी लिमिटेड को कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी दी गई थी। शुरुआत में उम्मीद थी कि कंपनी के माध्यम से बड़े स्तर पर पॉलीहाउस का निर्माण कराया जाएगा और किसानों को इसका लाभ जल्द मिलने लगेगा। हालांकि निर्धारित लक्ष्य की तुलना में योजना की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही। 22 हजार पॉलीहाउस के लक्ष्य के बावजूद योजना उस स्तर तक नहीं पहुंच सकी, जिसकी शुरुआत में उम्मीद की गई थी। लगातार धीमी प्रगति को देखते हुए अब सरकार ने संबंधित कार्यदायी संस्था से काम वापस लेने का फैसला किया है। इसके साथ ही पहले चरण में संस्था को किए गए भुगतान की भी रिकवरी की जाएगी। इसके लिए आगे की प्रक्रिया संबंधित स्तर पर शुरू की जाएगी।

हालांकि योजना में देरी के पीछे सिर्फ कार्यदायी संस्था की भूमिका ही नहीं, बल्कि कुछ प्रक्रियागत और नियमों से जुड़ी चुनौतियां भी सामने आई हैं। इन वजहों से निर्माण कार्य को अपेक्षित रफ्तार नहीं मिल सकी। ऐसे में संस्था को बदलने के बाद विभाग के सामने अब यह चुनौती भी होगी कि पुरानी अड़चनों को दूर करते हुए योजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

अब एमपैनल्ड वेंडर के जरिए होंगे पॉलीहाउस..

सरकार ने योजना को गति देने के लिए अब काम करने का तरीका बदल दिया है। नई व्यवस्था में किसी एक कार्यदायी संस्था के बजाय विभाग में एमपैनल्ड वेंडर के माध्यम से पॉलीहाउस स्थापित कराए जाएंगे। यानी किसानों की जरूरत के अनुसार अधिक व्यवस्थित तरीके से निर्माण कार्य आगे बढ़ाने की योजना है। भुगतान प्रक्रिया में भी बदलाव किया जा रहा है। इसके लिए सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था अपनाने की बात कही गई है। सरकार का मानना है कि नई प्रणाली से भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो सकेगी तथा योजना के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

विभाग के स्तर पर किसानों के साथ मिलकर योजना को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। नई व्यवस्था से आने वाले समय में पॉलीहाउस निर्माण की गति बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि करीब दो साल बीत जाने के बाद भी 22 हजार पॉलीहाउस के लक्ष्य से योजना काफी पीछे है, ऐसे में शेष लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी। पॉलीहाउस योजना को उत्तराखंड के उद्यान क्षेत्र में बदलाव लाने वाली महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया था। बड़े बजट और हजारों पॉलीहाउस के लक्ष्य के साथ शुरू हुई इस योजना का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचाने के लिए अब सरकार ने क्रियान्वयन व्यवस्था में बदलाव किया है। कार्यदायी संस्था से काम वापस लेने, भुगतान की रिकवरी और एमपैनल्ड वेंडर के जरिए नई व्यवस्था लागू करने के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि योजना की रफ्तार जमीन पर कितनी तेजी से बढ़ती है।

 

 

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