केदारनाथ यात्रा से पहले घोड़े-खच्चरों का रजिस्ट्रेशन शुरू, अब तक 1500 का पंजीकरण..
उत्तराखंड: केदारनाथ यात्रा को सुचारु और सुरक्षित तरीके से संचालित करने के लिए पशुपालन विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़े-खच्चरों की फिटनेस जांच, पंजीकरण, माइक्रोचिपिंग और बीमा की प्रक्रिया इन दिनों तेजी से की जा रही है। इसके लिए विभाग की ओर से विभिन्न स्थानों पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां पशु संचालकों के घोड़े-खच्चरों की जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराई जा रही हैं।विभागीय अधिकारियों के अनुसार यात्रा शुरू होने से पहले सभी घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण और स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक लगभग 1500 घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि करीब सात हजार पशुओं का पंजीकरण और जांच अभी बाकी है। पशुपालन विभाग की टीमें लगातार विभिन्न क्षेत्रों में शिविर लगाकर पशु संचालकों को पंजीकरण और जांच की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
केदारनाथ यात्रा में घोड़े-खच्चरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक लगभग 19 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई वाला पैदल मार्ग है, जहां बड़ी संख्या में तीर्थयात्री घोड़े-खच्चरों के माध्यम से यात्रा करते हैं। इसके साथ ही धाम तक राशन, दैनिक उपयोग की वस्तुएं और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने में भी इन पशुओं की अहम भूमिका रहती है। यही कारण है कि यात्रा शुरू होने से पहले इनके स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करना अनिवार्य किया गया है।
पशुपालन विभाग द्वारा घोड़े-खच्चरों की फिटनेस जांच के साथ-साथ माइक्रोचिपिंग, टैगिंग, रक्त सैंपलिंग, बीमा और पंजीकरण की प्रक्रिया भी कराई जा रही है। इससे यात्रा के दौरान पशुओं की पहचान, स्वास्थ्य स्थिति और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस पूरी प्रक्रिया में जिला पंचायत भी विभाग के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है। पिछले वर्ष घोड़े-खच्चरों के बीमा को लेकर कई तरह की समस्याएं सामने आई थीं। जानकारी के अनुसार बीते साल सैकड़ों पशुओं का बीमा नहीं कराया गया था। ऐसे में जब यात्रा मार्ग पर कुछ पशुओं की मौत हुई तो उनके संचालकों ने मुआवजे की मांग की, जिससे प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने कई तरह की दिक्कतें खड़ी हो गई थीं।
इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार पशुपालन विभाग ने बीमा को अनिवार्य रूप से लागू करने पर जोर दिया है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव गोयल के अनुसार इस वर्ष पशु संचालकों से पशु की अनुमानित कीमत के आधार पर लगभग पांच प्रतिशत बीमा प्रीमियम लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीमा प्रीमियम की राशि करीब 3500 रुपये निर्धारित की गई है। हालांकि कुछ स्थानों पर पशु संचालकों की ओर से बीमा प्रीमियम को लेकर आपत्ति भी जताई गई है, लेकिन विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था पशु मालिकों के हित में ही है। यदि यात्रा मार्ग पर बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य कारण से पशु की मृत्यु हो जाती है तो बीमा के माध्यम से संचालकों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा।
पशुपालन विभाग ने आगामी दिनों में विभिन्न स्थानों पर शिविर आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इन शिविरों के माध्यम से अधिक से अधिक पशु संचालकों को पंजीकरण और जांच की प्रक्रिया पूरी कराने का अवसर मिलेगा। विभाग के कार्यक्रम के अनुसार 13 मार्च को ल्वारा और त्यूड़ी में शिविर लगाए जाएंगे। इसके बाद 14 मार्च को नागजगई और जालमल्ला में शिविर आयोजित किए जाएंगे। वहीं 15 मार्च को कालीमठ और जाखधार में भी पंजीकरण और जांच शिविर लगाए जाने की योजना है। इन शिविरों में घोड़े-खच्चरों का फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा, साथ ही उनकी माइक्रोचिपिंग, टैगिंग, रक्त सैंपलिंग, बीमा और पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यात्रा के दौरान पशुओं और संचालकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पशुपालन विभाग का दावा है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण और स्वास्थ्य परीक्षण पूरा कर लिया जाएगा, जिससे केदारनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े और पूरी व्यवस्था सुरक्षित एवं व्यवस्थित तरीके से संचालित हो सके।