अशासकीय महाविद्यालयों तक पहुंची सीएम उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना, कैबिनेट की मंजूरी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में उच्च शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा निर्णय लिया गया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का दायरा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब यह योजना राज्य के अशासकीय महाविद्यालयों में भी लागू की जाएगी। यह योजना वर्ष 2023-24 से राजकीय महाविद्यालयों, राज्य विश्वविद्यालयों और उनके परिसरों में संचालित की जा रही है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शोध कार्य को प्रोत्साहन देना और छात्रों व शिक्षकों को अनुसंधान के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना है। योजना के तहत शोध कार्यों के लिए अधिकतम 18 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान है।
अब कैबिनेट के ताजा निर्णय के बाद राज्य के 21 अशासकीय महाविद्यालयों को भी इस योजना के दायरे में शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में भी शोध संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह कदम राज्य में नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को नई गति देगा। इसी बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। उच्च शिक्षा विभाग तथा इच्छुक अन्य विभागों में स्वामी विवेकानंद उत्तराखंड ई-पुस्तकालय योजना संचालित की जाएगी। इस योजना के माध्यम से छात्रों को ई-किताबें, समाचार पत्र, मैगजीन, अध्ययन सामग्री और शोध जर्नल्स की डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
योजना के तहत छात्रों से एक निर्धारित शुल्क लिया जाएगा। पारंपरिक पाठ्यक्रमों जैसे बीए, बीएससी और बीकॉम के छात्रों से 100 रुपये, सेमी प्रोफेशनल कोर्स जैसे बीएड और लॉ के लिए 250 रुपये तथा प्रोफेशनल कोर्स जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल और एग्रीकल्चर के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की अध्ययन सामग्री तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में वृद्धि होगी। कैबिनेट के इन निर्णयों को उच्च शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। शोध प्रोत्साहन और ई-पुस्तकालय जैसी पहलों से राज्य के शिक्षण संस्थानों में अकादमिक वातावरण और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।