उत्तराखंड

केदारनाथ ट्रैक पर जंगल में फंसा बुजुर्ग, SDRF ने सुरक्षित निकाला..

केदारनाथ ट्रैक पर जंगल में फंसा बुजुर्ग, SDRF ने सुरक्षित निकाला..

 

 

 

 

उत्तराखंड: केदारनाथ यात्रा मार्ग से जुड़े सोनप्रयाग क्षेत्र में बीती देर रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक बुजुर्ग यात्री घने जंगल में रास्ता भटक गया। मुनकटिया से लगभग डेढ़ किलोमीटर आगे जंगल क्षेत्र में अंधेरा होने के कारण वह मुख्य मार्ग तक नहीं पहुंच पाया और दिशा भ्रमित हो गया। सूचना मिलते ही एसडीआरएफ पोस्ट सोनप्रयाग की टीम तत्काल मौके के लिए रवाना हुई। प्राथमिक जानकारी में सामने आया कि 62 वर्षीय यात्री गूगल मैप के सहारे आगे बढ़ रहे थे, लेकिन इसी दौरान वे मुख्य ट्रैक से हटकर जंगल की ओर चले गए। रेस्क्यू किए गए व्यक्ति की पहचान राजभवन कौल (62 वर्ष), निवासी बाटोली, गोपदबनास, जिला सीधी (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है। एसडीआरएफ टीम ने उप निरीक्षक संतोष परिहार के नेतृत्व में आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ सघन सर्च अभियान चलाया। रात का घना अंधेरा, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ता और ठंडा मौसम टीम के लिए बड़ी चुनौती साबित हुआ। करीब दो किलोमीटर अंदर जंगल में तलाशी अभियान चलाने के बाद टीम ने यात्री को सुरक्षित खोज निकाला। प्राथमिक उपचार देने के बाद उन्हें स्थानीय पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। त्वरित कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों ने एसडीआरएफ की सराहना की।

आपको बता दे कि केदारनाथ धाम के कपाट फिलहाल बंद हैं और खुलने में अभी करीब दो महीने का समय शेष है। ऐसे में यात्रा मार्ग पर किसी यात्री का जंगल क्षेत्र में भटक जाना सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है। यह घटना इस बात का संकेत भी देती है कि ऑफ-सीजन में भी कुछ श्रद्धालु बिना पर्याप्त जानकारी के संवेदनशील क्षेत्रों की ओर रुख कर लेते हैं। प्रशासन ने यात्रियों और पर्यटकों से अपील की है कि पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में केवल डिजिटल मैप के भरोसे आगे न बढ़ें। स्थानीय प्रशासन, पुलिस या अधिकृत सूचना केंद्र से मार्ग की पुष्टि करने के बाद ही यात्रा करें। आपात स्थिति में तुरंत पुलिस या एसडीआरएफ से संपर्क करने की सलाह दी गई है। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि पहाड़ी इलाकों में तकनीक उपयोगी जरूर है, लेकिन स्थानीय मार्गदर्शन और सतर्कता उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

 

 

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