आयुष्मान-गोल्डन कार्ड योजनाओं में नई व्यवस्था लागू, इलाज होगा और आसान..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और आम जनता के लिए सुलभ बनाने की दिशा में राज्य सरकार इस वर्ष बड़े प्रशासनिक बदलाव लागू करने जा रही है। इन बदलावों का सीधा असर प्रदेश की दो प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं अटल आयुष्मान योजना और गोल्डन कार्ड योजना पर पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य इन योजनाओं के जरिए बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते वित्तीय दबाव को भी संतुलित करना है। राज्य सरकार ने बीते वर्ष यह अहम निर्णय लिया था कि अटल आयुष्मान योजना को इंश्योरेंस मोड पर और गोल्डन कार्ड योजना को हाइब्रिड मोड पर संचालित किया जाएगा।
इस प्रस्ताव को 24 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से न केवल इलाज की प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि अस्पतालों को भुगतान भी समय पर सुनिश्चित किया जा सकेगा। अटल आयुष्मान योजना की शुरुआत 25 दिसंबर 2018 को की गई थी और तब से यह योजना प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत ढाल बनी हुई है। योजना के तहत अब तक 17 लाख से अधिक मरीजों को निशुल्क इलाज की सुविधा मिल चुकी है, जिस पर राज्य सरकार लगभग 3400 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। वहीं प्रदेश में अब तक 61 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं, जो योजना की व्यापक पहुंच को दर्शाते हैं।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अटल आयुष्मान योजना के अंतर्गत इलाज से जुड़ा भुगतान सीधे इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से किया जाएगा। पहले यह जिम्मेदारी राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण निभाता था। इस बदलाव से क्लेम प्रक्रिया में तेजी आएगी और अस्पतालों को भुगतान में होने वाली देरी की समस्या भी काफी हद तक दूर होगी। इधर गोल्डन कार्ड योजना को लेकर भी सरकार ने अहम बदलाव किए हैं। पिछले पांच वर्षों में इस योजना पर लगभग 750 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जिसमें कर्मचारियों का अंशदान 60 से 65 प्रतिशत तक रहा है।
इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इसे हाइब्रिड मॉडल पर चलाने का फैसला किया है। स्वास्थ्य महानिदेशक सुनीता टम्टा के अनुसार हाइब्रिड मॉडल के तहत गोल्डन कार्ड योजना में अब 5 लाख रुपये तक का इलाज पहले की तरह कैशलेस रहेगा। यदि इलाज का खर्च इससे अधिक होता है, तो अतिरिक्त राशि इंश्योरेंस मोड के जरिए कवर की जाएगी। इससे कर्मचारियों को बेहतर और व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी, वहीं योजना भी लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनी रहेगी।
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तराखंड की मिशन निदेशक रीना जोशी ने साफ किया है कि इन बदलावों से लाभार्थियों को किसी तरह की असुविधा नहीं होगी। आयुष्मान कार्ड धारकों को पहले की तरह ही निशुल्क इलाज की सुविधा मिलती रहेगी। कार्ड, नंबर या प्रक्रिया में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि इंश्योरेंस मोड से योजना की पारदर्शिता और कार्यक्षमता दोनों में सुधार होगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि नई प्रणाली के लागू होने के बाद मरीजों और उनके परिजनों को कम कागजी कार्रवाई, तेज क्लेम प्रक्रिया और बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
साथ ही अस्पतालों को समय पर भुगतान मिलने से इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा। राज्य सरकार के अनुसार इंश्योरेंस और हाइब्रिड मॉडल अपनाने से निशुल्क इलाज पर बढ़ते आर्थिक बोझ को नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे भविष्य में अस्पतालों के बुनियादी ढांचे, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य कर्मियों पर अधिक निवेश करने का मार्ग भी प्रशस्त होगा। कुल मिलाकर अटल आयुष्मान और गोल्डन कार्ड योजनाओं में किया गया यह बदलाव जनहित, प्रशासनिक मजबूती और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।