उत्तराखंड

उत्तराखंड का ये गांव ग्रामीणों की एकजुटता के कारण कोरोना मुक्त…

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गांव में मई माह से ही है लॉकडाउन ,रोजमर्रा के कार्यों के लिए भी नहीं जा रहे ग्रामीण…

150 परिवारों में से किसी को नहीं हुआ कोरोना संक्रमण..

उत्तराखंड : कोरोना को देखते हुए भले ही देशभर में अनलॉक फोर चल रहा है, लेकिन देश के अंतिम गांव माणा में आज भी लॉकडाउन है। इसका परिणाम है कि यहां अभी तक एक भी कोरोना संक्रमण का मामला नहीं आया है। माणा गांव में ग्रामीण रोजमर्रा के कार्यों के लिए गांव से बाहर जाने में परहेज कर रहे हैं।

माणा गांव बदरीनाथ धाम से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां भोटिया जनजाति के ग्रामीण रहते हैं। शीतकाल में ग्रामीण गोपेश्वर नगर के समीप घिंघराण में रहते हैं और ग्रीष्मकाल में अपने पैतृक गांव माणा लौट जाते हैं। कोरोना को देखते हुए देशभर में लॉकडाउन घोषित किया गया। जब पहला अनलॉक हुआ तो माणा गांव के ग्रामीणों ने गांव में लॉकडाउन ही रखने का निर्णय लिया।

गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति को घुसने नहीं दिया जा रहा

यहां मई माह से बाहरी लोगों की आवाजाही बंद है। यही वजह है कि देश में कोरोना के मरीज बढ़ते जा रहे हैं जबकि गांव में रह रहे 150 परिवारों में से किसी को भी कोरोना की शिकायत नहीं हुई है।

ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि माणा गांव में किसी भी बाहरी व्यक्ति को घुसने नहीं दिया जा रहा है, जिस कारण गांव सुरक्षित है।

ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा बताते हैं कि ग्रामीणों ने राजमा, आलू, बंद गोभी और हरी सब्जी का उत्पादन किया है।

ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान

गत वर्षों तक बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा के दौरान तीर्थयात्री और पर्यटक सब्जी व दाल की खरीदारी करते थे, साथ ही बदरीनाथ धाम में सब्जी की खपत हो जाती थी, लेकिन इस बार यात्रा सीमित होने से सब्जी खेतों और घरों में सड़ रही है। ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

सेना की आवाजाही के लिए बनाया बाईपास मार्ग

चीन सीमा क्षेत्र में सेना की आवाजाही बाधित न हो इसके लिए ग्रामीणों ने गांव के समीप ही बाईपास मार्ग बनाया है, जिससे गांव भी सुरक्षित रहे और सेना के जवान भी सीमा क्षेत्र में पहुंच जाएं। ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा का कहना है कि कई बार सेना के जवान बसुधारा व अन्य जगहों पर जाते हैं इसलिए उनकी आवाजाही के लिए गांव के निचले हिस्से में वैकल्पिक रास्ता निकाला गया है।

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