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उत्तराखंड

जिम कॉर्बेट की जयंती पर स्कूली बच्चों ने रंगों में उकेरी वन्यजीव संरक्षण की कहानी..

जिम कॉर्बेट की जयंती पर स्कूली बच्चों ने रंगों में उकेरी वन्यजीव संरक्षण की कहानी..

 

 

 

उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध प्रकृतिविद, लेखक और वन्यजीव संरक्षण के प्रबल समर्थक जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती के अवसर पर रामनगर स्थित उत्तराखंड की पहली वाइल्डलाइफ आर्ट गैलरी में विशेष पेंटिंग एवं स्केच प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी कला के माध्यम से जिम कॉर्बेट के व्यक्तित्व, वन्यजीवों के प्रति उनके समर्पण और प्रकृति संरक्षण के संदेश को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने रंगों और कल्पनाशीलता का शानदार प्रदर्शन किया। किसी ने जिम कॉर्बेट का आकर्षक पोर्ट्रेट बनाया तो किसी ने जंगल के प्राकृतिक वातावरण में बाघ, हाथी, हिरण और अन्य वन्यजीवों को कैनवास पर उकेरा। कई चित्रों में जंगल की सुंदरता, जैव विविधता और मानव-प्रकृति के संतुलन का संदेश भी देखने को मिला। प्रतिभागियों की कलाकृतियों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया और गैलरी का वातावरण पूरी तरह प्रकृति और कला के रंगों से सराबोर हो गया।

प्रतियोगिता में शामिल छात्रा श्रेयसी ने अपनी पेंटिंग में जिम कॉर्बेट के जीवन के दो अलग-अलग पहलुओं को दर्शाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि जिम कॉर्बेट ने अपने जीवन की शुरुआत एक साहसी शिकारी के रूप में की थी, लेकिन समय के साथ उनके विचारों में बड़ा परिवर्तन आया और उन्होंने अपना जीवन वन्यजीव संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। श्रेयसी ने कहा कि यदि उनके जीवन में यह बदलाव नहीं आया होता तो शायद आज दुनिया उन्हें अलग दृष्टि से याद करती। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सकारात्मक सोच और सही निर्णय किसी भी व्यक्ति की पहचान बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिम कॉर्बेट केवल एक नाम नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण की एक प्रेरणा हैं। उनका जीवन हमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने और वन्यजीवों की रक्षा के लिए आगे आने का संदेश देता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पेड़-पौधों और वन्यजीवों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी समझें तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने में योगदान दें।

एक अन्य प्रतिभागी मान्या सिंह ने भी जिम कॉर्बेट को अपनी प्रेरणा बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पेंटिंग के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मान्या के अनुसार जिम कॉर्बेट ने अपने जीवन के अनुभवों से यह साबित किया कि इंसान यदि चाहे तो समाज और प्रकृति के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने बाघों सहित कई वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनकी प्रेरणा आज भी लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करती है। कार्यक्रम के आयोजक एवं वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार ने बताया कि जिम कॉर्बेट की जयंती को केवल स्मृति दिवस के रूप में नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से मनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता का मकसद बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उन्हें जिम कॉर्बेट के जीवन, उनके विचारों और संरक्षण की भावना से परिचित कराना भी है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है और वे वन्यजीवों के संरक्षण के महत्व को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स इस बात का प्रमाण हैं कि नई पीढ़ी पर्यावरण और जैव विविधता को लेकर जागरूक हो रही है। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों, शिक्षकों और कला प्रेमियों ने भी बच्चों की रचनात्मकता की सराहना की। प्रतिभागियों की कलाकृतियों में जिम कॉर्बेट के व्यक्तित्व के साथ-साथ जंगलों की खूबसूरती, बाघों की महत्ता और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश दिखाई दिया। आयोजन के अंत में प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया गया तथा उन्हें भविष्य में भी प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े ऐसे रचनात्मक प्रयासों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया। जिम कॉर्बेट की जयंती पर आयोजित यह प्रतियोगिता केवल एक कला आयोजन नहीं रही, बल्कि बच्चों के माध्यम से समाज तक प्रकृति संरक्षण का संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम भी बनी। आयोजन ने यह साबित किया कि यदि नई पीढ़ी को सही दिशा और अवसर मिले तो वह पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को और अधिक मजबूत बना सकती है।

 

 

 

 

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