26 फरवरी से केदारनाथ रूट पर घोड़े-खच्चरों का पंजीकरण अभियान शुरू..
उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की आगामी यात्रा को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंच चुकी हैं। एक ओर जहां सुरक्षा, यातायात और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पशुपालन विभाग ने भी यात्रा संचालन की अहम कड़ी माने जाने वाले घोड़े-खच्चरों के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू कर दी है। विभागीय निर्णय के अनुसार 26 फरवरी से यात्रा में संचालित होने वाले सभी घोड़े-खच्चरों का अनिवार्य बीमा, स्वास्थ्य परीक्षण (फिटनेस जांच) और पंजीकरण अभियान शुरू किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया यात्रा आरंभ होने से लगभग डेढ़ माह पूर्व पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि सीजन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या जोखिम की स्थिति न बने। जानकारी के अनुसार होली पर्व तक तीन से चार विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। होली अवकाश के बाद भी चरणबद्ध तरीके से कैंप लगाए जाएंगे, जिससे कोई भी पशुपालक इस अनिवार्य प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।
पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन दो शिविर संचालित किए जाएंगे। इन शिविरों में एक ही स्थान पर स्वास्थ्य परीक्षण, दस्तावेजों का सत्यापन और बीमा प्रक्रिया पूरी की जाएगी, ताकि अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सके। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर हजारों श्रद्धालु पैदल, डंडी-कंडी और घोड़े-खच्चरों के माध्यम से धाम पहुंचते हैं। ऐसे में पशुओं का स्वस्थ और पंजीकृत होना यात्रा की सुचारू व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल फिट घोषित पशु ही यात्रा मार्ग पर संचालित हों। बीमा कवर से किसी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा भी मिलेगी। केदारनाथ धाम की यात्रा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होती है। ऐसे में तैयारियों का समय से पहले पूरा होना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित यात्रा अनुभव मिल सके।
पशुपालन विभाग ने इस वर्ष सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना बीमा और वैध फिटनेस प्रमाणपत्र के किसी भी घोड़े-खच्चर को यात्रा मार्ग पर संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यात्रा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है, ताकि पशुओं और श्रद्धालुओं दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए इस बार बीमा प्रीमियम का भुगतान केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। शिविरों में किसी भी प्रकार का नकद लेन-देन नहीं होगा। अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था से अनियमितताओं पर रोक लगेगी और पूरी प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित बनेगी।
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव गोयल ने कहा कि केदारनाथ यात्रा में घोड़े-खच्चरों की भूमिका बेहद अहम है। गौरीकुंड से धाम तक की कठिन चढ़ाई में हजारों श्रद्धालु इन्हीं पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में पशुओं का स्वस्थ, सुरक्षित और बीमित होना न केवल पशुपालकों के हित में है, बल्कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से भी सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि वे निर्धारित शिविरों में समय पर पहुंचकर बीमा, फिटनेस जांच और पंजीकरण की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर लें। इससे यात्रा संचालन सुचारु और सुरक्षित ढंग से संपन्न किया जा सकेगा। प्रशासन का कहना है कि इस वर्ष यात्रा प्रबंधन में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी और तय मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
केदारनाथ यात्रा 2026 को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि इस बार नियमों और मानकों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। यात्रा प्रबंधन को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और तैयारियों की निगरानी लगातार की जा रही है। पशुपालन विभाग की हालिया पहल को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम माना जा रहा है। यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़े-खच्चरों के बीमा, फिटनेस और पंजीकरण को अनिवार्य बनाकर प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
चारधाम यात्रा की व्यापक तैयारियों के बीच यह अभियान दर्शाता है कि इस वर्ष व्यवस्थाओं को पहले से अधिक मजबूत और अनुशासित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन यात्रा संचालन को व्यवस्थित ढांचे में संचालित करने की दिशा में काम कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते की जा रही ये तैयारियां यात्रा सीजन के दौरान बेहतर प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और तीर्थयात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने में सहायक साबित होंगी। प्रशासन का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, व्यवस्थित और सहज यात्रा अनुभव उपलब्ध कराया जा सके।