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उत्तराखंड

मधुमक्खी पालन से बढ़ेगी किसानों की आय, उत्तराखंड में बन रही नई पॉलिसी..

मधुमक्खी पालन से बढ़ेगी किसानों की आय, उत्तराखंड में बन रही नई पॉलिसी..

 

 

 

उत्तराखंड: पर्यटन और प्राकृतिक संपदा के लिए पहचान रखने वाला उत्तराखंड अब शहद (हनी) उत्पादन के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। राज्य देश में शहद उत्पादन में आठवें स्थान पर है और सरकार की कोशिश है कि इसे एक संगठित, ब्रांडेड और ऑर्गेनिक हनी स्टेट के रूप में स्थापित किया जाए। इसी दिशा में हनी मिशन के तहत उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और नई बी-कीपिंग पॉलिसी पर काम तेज कर दिया गया है। राज्य सरकार का फोकस सीमांत और लघु किसानों की आय बढ़ाने पर है। पारंपरिक खेती से हटकर फ्लोरीकल्चर (पुष्पकृषि), ऑर्गेनिक फार्मिंग और मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में कम भूमि पर भी मधुमक्खी पालन संभव है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है। वर्तमान में मौन पालन योजना के तहत किसानों को 40 प्रतिशत सब्सिडी पर बी-कोलोनी बॉक्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ प्रतिदिन 1000 रुपये का प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है। उद्यान विभाग के माध्यम से किसान करीब 1200 रुपये प्रति किलो की दर से शहद का विपणन कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है।

ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन से मिलेगा प्रीमियम बाजार..

सरकार की रणनीति केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शहद को ऑर्गेनिक प्रमाणित कर वैश्विक बाजार में प्रीमियम वैल्यू दिलाने की है। इसके लिए राज्य में उत्तराखंड सीड एवं ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन बोर्ड की भूमिका अहम होगी। ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन मिलने के बाद उत्तराखंड का शहद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा। प्रदेश में अब तक मधुमक्खी पालन के लिए अलग से व्यापक नीति नहीं थी। इसे ध्यान में रखते हुए उद्यान विभाग एक समग्र बी-कीपिंग पॉलिसी तैयार कर रहा है। इस नीति में उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और विपणन तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने का प्रावधान होगा। खासतौर पर महिला किसानों और युवा उद्यमियों को इस क्षेत्र से जोड़ने पर विशेष जोर रहेगा। सरकार ने उन राज्यों की नीतियों और प्रक्रियाओं का अध्ययन करने का निर्णय लिया है, जहां बागवानी और मधुमक्खी पालन में उल्लेखनीय सफलता मिली है। विशेषज्ञों और अधिकारियों की टीम वहां जाकर बेस्ट प्रैक्टिस का अध्ययन करेगी, ताकि उत्तराखंड में भी प्रभावी मॉडल लागू किया जा सके।

उद्यान सचिव एस एन पांडे के अनुसार उत्तराखंड के शहद की अपनी विशिष्ट पहचान है। पर्वतीय क्षेत्रों की जैव विविधता और प्राकृतिक फूलों से तैयार शहद स्वास्थ्य की दृष्टि से मूल्यवान माना जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि किसान खेती के साथ-साथ शहद उत्पादन को भी आय के सशक्त विकल्प के रूप में अपनाएं। विश्व स्तर पर ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में उत्तराखंड शहद उत्पादन, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग को संगठित कर खुद को ऑर्गेनिक हनी के प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। यदि प्रस्तावित बी-कीपिंग पॉलिसी को मंजूरी मिलती है, तो यह राज्य के हजारों छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का स्थायी और टिकाऊ स्रोत साबित हो सकती है।

 

 

 

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