उत्तराखंड

उत्तराखंड में हर जिले में तीन-तीन रिजर्व एंबुलेंस, अनुभवी कर्मियों की नियुक्ति जल्द..

उत्तराखंड में हर जिले में तीन-तीन रिजर्व एंबुलेंस, अनुभवी कर्मियों की नियुक्ति जल्द..

 

 

उत्तराखंड: किसी भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं की भूमिका बेहद अहम होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ आपातकालीन एंबुलेंस नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में कदम उठा रही है। सरकार ने 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा को पहले से ज्यादा प्रभावी और तेज बनाने का निर्णय लिया है। इस नई पहल के तहत आपातकालीन सेवा के बेड़े में आधुनिक और अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नई एंबुलेंस को शामिल किया जाएगा। इन एंबुलेंस में आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध होंगे, ताकि मरीज को मौके पर ही बेहतर प्राथमिक उपचार दिया जा सके। सरकार की योजना के अनुसार एंबुलेंस सेवाओं में प्रशिक्षित और अनुभवी कार्मिकों की नियुक्ति भी की जाएगी।

इससे आपात स्थिति में मरीजों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता मिल सकेगी। खास तौर पर गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और दुर्घटना पीड़ितों को इसका लाभ मिलेगा। आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में तीन-तीन एंबुलेंस को रिजर्व रखने का भी निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी जिले में एक साथ कई आपात स्थितियां उत्पन्न होने पर सेवाएं बाधित न हों। सरकार का फोकस पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में एंबुलेंस के रिस्पांस टाइम को कम करने पर है। खासतौर पर दुर्गम और दूरस्थ इलाकों में समय पर एंबुलेंस पहुंचाने के लिए व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इन कदमों से राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनेंगी।

राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शनिवार को विभागीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की जरूरतों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 108 एंबुलेंस सेवा स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ है और इसे आम जनता के लिए अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सुलभ बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में एंबुलेंस का समय पर पहुंचना कई बार मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाता है। बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने 108 एंबुलेंस सेवा की नई निविदा प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिए कि एंबुलेंस के बेड़े में ऐसी आधुनिक एंबुलेंस को शामिल किया जाए, जो नवीनतम चिकित्सा उपकरणों से लैस हों, ताकि मरीजों को मौके पर ही बेहतर प्राथमिक उपचार मिल सके।

मरीजों और कॉल करने वालों को हो रही परेशानियों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने एंबुलेंस सेवा के कॉल सेंटर में अतिरिक्त कार्मिकों की नियुक्ति करने के निर्देश भी दिए। इससे कॉल रिस्पांस में तेजी आएगी और आपातकालीन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल सहायता मिल सकेगी। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा की स्पष्ट जवाबदेही तय करने और रिस्पांस टाइम को न्यूनतम स्तर तक लाने के निर्देश दिए। बैठक में यह भी तय किया गया कि मैदानी क्षेत्रों में एंबुलेंस का अधिकतम रिस्पांस टाइम 13 मिनट और पर्वतीय क्षेत्रों में 18 मिनट निर्धारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तय समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

 

हर जिले में 3-3 एंबुलेंस रिजर्व में रखने के निर्देश..

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। जरूरतमंदों को समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो सके, इसके लिए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश के प्रत्येक जिले में तीन-तीन एंबुलेंस को रिजर्व में रखने के निर्देश दिए हैं। इन एंबुलेंस को बैकअप के तौर पर रखा जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अब 108 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से मरीजों को सीधे उसी अस्पताल में पहुंचाया जाएगा, जहां उनकी बीमारी के अनुसार विशेषज्ञ डॉक्टर और उपचार की सुविधा उपलब्ध हो। इससे मरीजों को अनावश्यक रेफर की समस्या से राहत मिलेगी और इलाज में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा। बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को आईपीएचएस (भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक) के अनुरूप तकनीकी संवर्ग के पदों के पुनर्गठन के निर्देश भी दिए।

इसके तहत लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन और ऑप्टोमेट्रिस्ट जैसे पदों की समीक्षा कर उन्हें जरूरत के अनुसार पुनर्संरचित किया जाएगा, ताकि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके। स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी चिकित्सा इकाइयों और विभागीय कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके साथ ही अवकाश के दौरान चिकित्सकों की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि किसी भी स्थिति में मरीजों को उपचार के लिए परेशानी न हो। स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन सभी फैसलों को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए और नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाए, ताकि आम जनता को बेहतर और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

 

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top