उत्तराखंड

माउंट कुन के बाद भागीरथी-II भी फतह, अंकुर रावत ने शिखर पर फहराया तिरंगा..

माउंट कुन के बाद भागीरथी-II भी फतह, अंकुर रावत ने शिखर पर फहराया तिरंगा..

 

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पर्वतारोही और भारतीय सेना में सूबेदार अंकुर रावत ने हिमालय में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। दो बार माउंट एवरेस्ट फतह कर चुके अंकुर रावत ने 22 सितंबर 2026 को 6,512 मीटर ऊंची माउंट भागीरथी-II का सफल आरोहण किया और शिखर पर तिरंगा फहराया। इससे पहले 17 जुलाई को उन्होंने 7,077 मीटर ऊंची माउंट कुन की चढ़ाई भी सफलतापूर्वक पूरी की थी। करीब दो महीने के भीतर दो ऊंची चोटियों पर सफल आरोहण ने अंकुर रावत के पर्वतारोहण सफर में एक और उपलब्धि जोड़ दी है। उनका कहना है कि पहाड़ दूर से जितने आसान नजर आते हैं, उनकी वास्तविक चढ़ाई उतनी ही कठिन होती है। भागीरथी-II अभियान के दौरान टीम को चट्टानी रास्तों, बर्फीले हिस्सों, बदलते मौसम और अत्यधिक ऊंचाई जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अंकुर रावत रुड़की के विनीत नगर, पनियाल रोड के निवासी हैं। उनके पिता नारायण सिंह रावत और माता आनंदी देवी हैं। उनका मूल गांव पौड़ी गढ़वाल के पट्टी असवालस्यूं क्षेत्र में स्थित पीपला सुरलगांव है।

भागीरथी-II के अंतिम हिस्से में चट्टानी चढ़ाई के बाद करीब 300 मीटर का बर्फीला क्षेत्र सामने आया। इस हिस्से को पार करना अभियान की बड़ी चुनौतियों में शामिल रहा। अंकुर के मुताबिक, शिखर दिखाई देने के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं होतीं। कई बार अंतिम कुछ मीटर ही सबसे चुनौतीपूर्ण साबित होते हैं और ऐसे समय में अनुभव, धैर्य और सही निर्णय बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। भागीरथी क्षेत्र धार्मिक और पर्वतारोहण दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। गंगोत्री से गौमुख और नंदनवन की ओर बढ़ने के बाद पर्वतारोहियों को ग्लेशियर, मोरेन, चट्टानी भू-भाग और कम ऑक्सीजन वाली ऊंचाई जैसी कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। माउंट भागीरथी-II के शिखर से अंकुर को माउंट शिवलिंग, नंदी पर्वत, थलय सागर, मेरु, केदारनाथ पर्वत, केदार डोम, चौखंबा, सतोपंथ, वासुकी, माना, कामेट, मुकुट और सुदर्शन समेत कई प्रमुख हिमालयी चोटियों के दर्शन हुए।

अंकुर रावत पर्वतारोहण अभियान की सफलता के लिए सही रूट के चयन, रूट ओपनिंग और रोप फिक्सिंग के साथ टीम अनुशासन को बेहद अहम मानते हैं। उनके अनुसार कठिन परिस्थितियों में टीम के सदस्यों के बीच आपसी विश्वास और बेहतर तालमेल अभियान को सुरक्षित तरीके से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भागीरथी-II की सफलता के बाद अंकुर की योजना उन ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराने की है, जहां वह अभी तक नहीं पहुंच सके हैं। इसके साथ ही वह अपने अनुभवों को नए ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों तक पहुंचाना चाहते हैं, ताकि वे पर्वतीय क्षेत्रों में रूट, टेरेन और संभावित चुनौतियों की बेहतर जानकारी के साथ सुरक्षित तरीके से अभियान पर निकल सकें।

 

 

 

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