उत्तराखंड

उत्तराखंड में शुरू हुआ आयुष सेतु पोर्टल, घर बैठे होगा योग केंद्रों का रजिस्ट्रेशन..

उत्तराखंड में शुरू हुआ आयुष सेतु पोर्टल, घर बैठे होगा योग केंद्रों का रजिस्ट्रेशन..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड को योग और वेलनेस के क्षेत्र में देश-दुनिया के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है। उत्तराखंड योग नीति-2025 के तहत तैयार किए गए आयुष सेतु पोर्टल का शनिवार को आयुष मंत्री मदन कौशिक ने शुभारंभ किया। पोर्टल के शुरू होने से प्रदेश में संचालित योग वेलनेस केंद्रों के पंजीकरण और प्रमाणन की प्रक्रिया अब ऑनलाइन हो सकेगी। आयुष एवं आयुष शिक्षा विभाग की ओर से तैयार किए गए इस एकीकृत पोर्टल के माध्यम से योग केंद्र संचालकों को विभिन्न सेवाओं और सरकारी योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा मिलेगी। इससे पंजीकरण, प्रमाणन और वित्तीय सहायता से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।

एक ही पोर्टल पर मिलेंगी कई सुविधाएं
प्रदेश में बड़ी संख्या में योग, पंचकर्म और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। इन संस्थानों का पंजीकरण और प्रमाणन अनिवार्य किए जाने के बाद आयुष सेतु पोर्टल को महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। पोर्टल के जरिए योग केंद्रों के लिए वन टाइम कैपिटल सब्सिडी, योग प्रशिक्षकों की फीस प्रतिपूर्ति, योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड की परीक्षा फीस की प्रतिपूर्ति और आयुष अस्पतालों के लिए एनएबीएच फीस रीइंबर्समेंट जैसी सुविधाओं के लिए आवेदन किया जा सकेगा। योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध करने वाली संस्थाएं रिसर्च ग्रांट के लिए भी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी। पोर्टल में प्रशासनिक स्तर पर आवेदन की जांच और निगरानी की व्यवस्था भी शामिल की गई है। जिला स्तर पर आवेदन की प्रारंभिक जांच, भौतिक सत्यापन और मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके बाद निदेशालय स्तर पर अंतिम स्वीकृति देने के साथ पोर्टल की गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

योग केंद्रों के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान
योग नीति-2025 में प्रदेश में योग और वेलनेस गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में योग केंद्र स्थापित करने पर लागत का 50 प्रतिशत तक, अधिकतम 20 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक, अधिकतम 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा सकती है। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रति परियोजना 10 लाख रुपये तक के शोध अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा होम स्टे, होटल, रिजॉर्ट, स्कूल और कॉलेजों में योग केंद्र स्थापित करने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। योग शिविरों के आयोजन के लिए अधिकतम 15 हजार रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है। योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड से प्रमाणित प्रशिक्षकों को भी नीति के तहत प्रोत्साहन दिया जाएगा। प्रमाणित योग प्रशिक्षकों की परीक्षा फीस की प्रतिपूर्ति के साथ भविष्य में स्थापित होने वाले योग केंद्रों को प्रशिक्षित योग प्रशिक्षकों की जानकारी उपलब्ध कराने की योजना भी है।

2030 तक पांच योग हब विकसित करने का लक्ष्य
उत्तराखंड योग नीति-2025 का उद्देश्य प्रदेश को योग और वेलनेस के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। नीति के तहत वर्ष 2030 तक राज्य में पांच प्रमुख योग हब विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें कोलीढेक, व्यास/दारमा/चौदांस घाटी, टिहरी झील, मुक्तेश्वर और जागेश्वर क्षेत्र को शामिल किया गया है नीति में योग संस्थानों के शत-प्रतिशत पंजीकरण और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मानक तय किए गए हैं। साथ ही ऑनलाइन योग प्लेटफॉर्म और योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।

घर बैठे मिल सकेगी योजना की जानकारी
आयुष मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आयुष सेतु पोर्टल के माध्यम से योग नीति से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। योग केंद्रों के पंजीकरण और प्रमाणन के साथ वित्तीय सहायता से संबंधित योजनाओं के लिए भी ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। आयुष विभाग की सचिव रंजना राजगुरु ने बताया कि पोर्टल में योग नीति के अलावा पर्यटन और उद्यम विभाग से संबंधित सब्सिडी की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है। वर्तमान में संचालित योग एवं वेलनेस केंद्रों के साथ भविष्य में स्थापित होने वाले केंद्रों का पंजीकरण भी आवश्यक होगा। आयुष सेतु पोर्टल के जरिए सरकार का उद्देश्य योग क्षेत्र से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाना है। ऐसे में लोग घर बैठे ही योग नीति के तहत दिए जा रहे लाभ को जान सकते हैं। साथ ही रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. साथ ही कहा कि भविष्य में खुलने वाले योग एवं वैलनेस केंद्रों के साथ ही वर्तमान समय में संचालित सभी योग केंद्रों को भी रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य हैं।

 

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top