सिद्धपीठ कालीमठ से शुरू हुई दिवारा यात्रा, मां कालीमाई के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु..
उत्तराखंड: रुद्रप्रयाग जिले के प्रसिद्ध सिद्धपीठ कालीमठ में इन दिनों धार्मिक उल्लास का माहौल है। वेद ऋचाओं की गूंज, ढोल-दमाऊं की थाप और मां काली के जयकारों के बीच भगवती कालीमाई की दिवारा यात्रा के दूसरे चरण का विधिवत शुभारंभ किया गया। यात्रा के आरंभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कालीमठ पहुंचे और मां भगवती के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद मां भगवती की उत्सव डोली अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। दिवारा यात्रा के पहले दिन डोली नारायणकोटी गांव पहुंची। यहां ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां भगवती का स्वागत किया। डोली के गांव में पहुंचते ही ढोल-दमाऊं की थाप और मां काली के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर डोली की अगवानी की और घर-घर मां भगवती के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान लोगों ने परिवार और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मां की डोली के गांव पहुंचने को लेकर स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
केदारघाटी के विभिन्न गांवों में पहुंचेगी डोली
दिवारा यात्रा के दूसरे चरण में भगवती कालीमाई की डोली केदारघाटी के अलग-अलग गांवों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण करेगी। जिन स्थानों पर डोली पहुंचेगी, वहां ग्रामीण अपनी परंपराओं के अनुसार मां भगवती का स्वागत करेंगे। यात्रा के दौरान पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कप्रवाण ने कहा कि मां भगवती की दिवारा यात्रा को लेकर क्षेत्र में विशेष उत्साह है। वहीं मंदिर समिति के सदस्य प्रह्लाद पुष्पवाण के अनुसार कालीमठ समेत पूरी केदारघाटी में यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था देखने को मिल रही है। दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र की लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता से भी जुड़ी हुई है। महामंत्री सुरेशानंद गौड़ ने बताया कि यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
हर पड़ाव पर मां की अगवानी की तैयारी
मां भगवती की डोली के स्वागत के लिए ग्रामीण अपने स्तर पर तैयारियां कर रहे हैं। अलग-अलग गांवों में श्रद्धालुओं के स्वागत और प्रसाद की व्यवस्था की जा रही है। दिवारा यात्रा प्रभारी प्रकाश पुरोहित ने बताया कि मां कालीमाई की डोली के विभिन्न गांवों और तीर्थस्थलों में पहुंचने को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दिवारा यात्रा के दौरान मां भगवती अपने भक्तों की कुशलक्षेम पूछती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। इसी आस्था के चलते ग्रामीण पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ डोली की अगवानी कर रहे हैं। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ केदारघाटी के अलग-अलग पड़ावों पर धार्मिक गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों का मानना है कि दिवारा यात्रा क्षेत्र की पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मां की डोली के प्रत्येक पड़ाव पर होने वाले स्वागत और धार्मिक आयोजनों से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।