उत्तराखंड

संस्कृत अध्ययन को मिलेगा वैश्विक मंच, उत्तराखंड और नेपाल के विश्वविद्यालयों के बीच होगा एमओयू..

संस्कृत अध्ययन को मिलेगा वैश्विक मंच, उत्तराखंड और नेपाल के विश्वविद्यालयों के बीच होगा एमओयू..

 

 

उत्तराखंड: संस्कृत भाषा और शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से उत्तराखंड और नेपाल के बीच शैक्षणिक सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय के बीच जल्द ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस समझौते के जरिए संयुक्त शोध, शिक्षक-छात्र आदान-प्रदान और अकादमिक सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। उत्तराखंड में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा मिलने के बाद राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा और अनुसंधान को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में नेपाल के साथ विश्वविद्यालय स्तर पर सहयोग स्थापित करने की योजना तैयार की गई है, जिससे दोनों देशों के विद्वानों और शोधार्थियों को एक साझा मंच मिल सके।

हाल ही में संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित नेपाल दूतावास में नेपाल के कार्यवाहक राजदूत डॉ. सुरेंद्र थापा से मुलाकात की। बैठक में संस्कृत अनुसंधान, शिक्षण पद्धतियों के आदान-प्रदान, संयुक्त अकादमिक कार्यक्रमों और विद्वानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।प्रस्तावित एमओयू के तहत दोनों विश्वविद्यालय संस्कृत से जुड़े विभिन्न विषयों पर संयुक्त शोध परियोजनाएं संचालित करेंगे। भारत और नेपाल के शोधार्थी मिलकर अनुसंधान कार्य करेंगे तथा उनके निष्कर्षों को संयुक्त रूप से प्रकाशित करने की भी योजना है। इसका उद्देश्य संस्कृत अध्ययन को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देना और शोध गतिविधियों को अधिक प्रभावी बनाना है। समझौते के बाद शिक्षक और विद्यार्थियों के लिए एक्सचेंज प्रोग्राम भी शुरू किए जा सकते हैं। इसके माध्यम से दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षक और छात्र एक-दूसरे के संस्थानों में जाकर अध्ययन, अध्यापन और शोध कार्यों में भाग ले सकेंगे। इससे संस्कृत की पारंपरिक और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।

नेपाल की समृद्ध संस्कृत परंपरा और भारत की शोध विशेषज्ञता को एक मंच पर लाकर दोनों देश संस्कृत अध्ययन के नए आयाम विकसित करने की दिशा में काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल संस्कृत अनुसंधान को गति देगी, बल्कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक और बौद्धिक संबंधों को भी और मजबूत करेगी।संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंध केवल भौगोलिक निकटता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संस्कृत, दर्शन, साहित्य और साझा सांस्कृतिक विरासत से भी गहराई से जुड़े हैं। दोनों विश्वविद्यालयों के बीच होने वाला यह सहयोग ज्ञान, अनुसंधान और अकादमिक आदान-प्रदान के नए अवसर प्रदान करेगा। एमओयू पर सहमति बनने के बाद संयुक्त अनुसंधान, अकादमिक कार्यक्रम, शिक्षक-छात्र विनिमय और साझा प्रकाशनों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इससे उत्तराखंड के शोधार्थियों और संस्कृत विद्वानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्य करने के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

 

 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top