अब उत्तराखंड के नौनिहाल सीधे IIT विशेषज्ञों से करेंगे संवाद..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सारकोट ने ग्रामीण विकास और डिजिटल शिक्षा की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित विधानसभा परिसर के समीप बसे इस गांव में अब अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी (ई-लाइब्रेरी) की शुरुआत हो गई है। इस पहल का उद्देश्य गांव के बच्चों और युवाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल शिक्षा और देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से जोड़ना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को भी शहरों जैसी गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें। डिजिटल लाइब्रेरी का शुभारंभ गांव के महिला मिलन केंद्र भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान किया गया। उद्घाटन गांव के 85 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक मनवर सिंह के हाथों कराया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी ने की। यह पहल उत्तराखंड जलागम परिषद के उपाध्यक्ष रमेश गड़िया द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप ऋत रूरल फाउंडेशन के सहयोग से साकार हुई है। संस्था के संस्थापक अनुराग त्रिवेदी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम घोषित होने के बाद सारकोट में विकास कार्यों को नई गति मिली है। गांव में सड़क, पेयजल, विद्युत व्यवस्था, पथ प्रकाश और अन्य बुनियादी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पूरे गांव को एक समान रंग-रोगन कर आकर्षक स्वरूप दिया गया है, जिससे गांव की पहचान भी बदली है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए कृषि, उद्यान, पशुपालन और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। अब डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत से शिक्षा के क्षेत्र में भी गांव एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा। ग्राम प्रधान ने कहा कि ई-लाइब्रेरी केवल कंप्यूटर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव के बच्चों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने का माध्यम बनेगी। इसके जरिए विद्यार्थी ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, ई-पुस्तकों, डिजिटल कोर्स और विभिन्न शैक्षणिक संसाधनों का लाभ उठा सकेंगे। इससे ग्रामीण परिवेश में रहने वाले विद्यार्थियों को भी प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।ऋत रूरल फाउंडेशन के संस्थापक अनुराग त्रिवेदी ने बताया कि संस्था का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। उनका कहना था कि यदि गांवों में आधुनिक शिक्षा और तकनीक की पहुंच सुनिश्चित की जाए तो पलायन जैसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल डिजिटल लाइब्रेरी में चार कंप्यूटर स्थापित किए गए हैं, जिनकी संख्या भविष्य में बढ़ाई जाएगी। इन कंप्यूटरों को डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है, जिससे बच्चों को देश-विदेश के ज्ञान संसाधनों तक पहुंच मिलेगी।
अनुराग त्रिवेदी ने कहा कि इस पहल के माध्यम से गांव के छात्र-छात्राएं आईआईटी कानपुर और आईआईटी दिल्ली जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के शिक्षाविदों से भी ऑनलाइन जुड़ सकेंगे। इससे उन्हें विज्ञान, तकनीक, नवाचार और करियर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलेगी। भविष्य में स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किल्स और अन्य आधुनिक तकनीकों से संबंधित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराने की योजना है। उन्होंने जानकारी दी कि उनकी संस्था अब तक उत्तराखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में 11 डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित कर चुकी है। आने वाले समय में गैरसैंण क्षेत्र के अन्य गांवों में भी ऐसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।डिजिटल लाइब्रेरी शुरू होने के बाद गांव के बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। जूनियर कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राओं भाग्यलक्ष्मी और रचना ने कहा कि अब उन्हें पहली बार गांव में ही कंप्यूटर सीखने और इंटरनेट के माध्यम से नई-नई जानकारियां हासिल करने का अवसर मिलेगा। उनका मानना है कि इससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों बेहतर होंगे। कार्यक्रम में महिला मंगल दल की सदस्याएं, ग्रामीण, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को गांव के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।
सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधान हैं प्रियंका नेगी
सारकोट की ग्राम प्रधान प्रियंका नेगी उत्तराखंड की सबसे कम उम्र की ग्राम प्रधानों में शामिल हैं। वर्ष 2025 के पंचायत चुनाव में जीत दर्ज करते समय उनकी उम्र मात्र 21 वर्ष थी। राजनीति शास्त्र में स्नातक प्रियंका नेगी अपने गांव में विकास, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को लेकर लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम के रूप में सारकोट में हो रहे विकास कार्यों के बीच डिजिटल लाइब्रेरी की शुरुआत ग्रामीण शिक्षा को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की पहल अन्य गांवों तक भी पहुंचती है तो डिजिटल शिक्षा का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों बच्चों तक पहुंच सकेगा और ग्रामीण भारत की शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।