उत्तराखंड

उत्तराखंड में संस्कृत के उत्थान की बड़ी पहल, उच्च स्तरीय आयोग के गठन की तैयारी तेज..

उत्तराखंड में संस्कृत के उत्थान की बड़ी पहल, उच्च स्तरीय आयोग के गठन की तैयारी तेज..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार राज्य में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और भारतीय ज्ञान परंपरा को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की पहल पर प्रस्तावित उत्तराखंड संस्कृत आयोग के गठन को लेकर सचिवालय में उच्च स्तरीय संवाद एवं परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में देशभर के प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वानों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर आयोग की संरचना, कार्यक्षेत्र और भावी कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श किया। बैठक की अध्यक्षता कर रहे संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने राज्य में संस्कृत शिक्षा की वर्तमान स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, उत्तराखंड संस्कृत संस्थान, संस्कृत शिक्षा निदेशालय तथा संस्कृत शिक्षा परिषद के माध्यम से संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल संस्कृत भाषा का संरक्षण करना नहीं, बल्कि उसे आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप नई पहचान देना भी है।

उत्तराखंड में संस्कृत को मिला है विशेष स्थान

बैठक में कहा गया कि वर्ष 2010 में उत्तराखंड ने संस्कृत को अपनी द्वितीय राजभाषा का दर्जा देकर देश के सामने एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया था। यह निर्णय राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जाता है। वर्तमान समय में राज्य के विभिन्न जिलों में संस्कृत ग्रामों की अवधारणा, संस्कृत कुटुंब सम्मेलन और संस्कृत विदुषी सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है, जिससे भाषा के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रस्तावित उत्तराखंड संस्कृत आयोग का दायरा केवल भाषा संरक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए। आयोग को भारतीय ज्ञान परंपरा, वेद, उपनिषद, दर्शन, योग, आयुर्वेद, ज्योतिष, वैदिक अध्ययन, अनुसंधान, नवाचार, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी संस्कृत शिक्षा को भी बढ़ावा देने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। इसके साथ ही नई पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ने के लिए आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों का अधिक उपयोग करने पर भी बल दिया गया।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद तेज हुई प्रक्रिया

बैठक में कहा गया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्कृत के प्रभावी संरक्षण और विकास के लिए उच्च स्तरीय संस्कृत आयोग गठित करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। उसी घोषणा के अनुरूप आयोग की रूपरेखा तैयार करने के लिए देशभर के संस्कृत विश्वविद्यालयों, विद्वानों और विभिन्न संस्थाओं से सुझाव आमंत्रित किए गए, जिन पर अब विस्तार से विचार किया जा रहा है।

राष्ट्रीय स्तर पर ‘संस्कृत विजय यात्रा’ का प्रस्ताव

बैठक में संस्कृत के व्यापक जनजागरण के लिए देशभर में ‘संस्कृत विजय यात्रा’ आयोजित करने का सुझाव भी सामने आया। विशेषज्ञों का मानना था कि इस अभियान के माध्यम से संस्कृत भाषा को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जा सकता है। साथ ही संस्कृत विश्वविद्यालयों, अकादमियों और विद्वानों के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर की समन्वित कार्ययोजना तैयार करने पर भी सहमति बनी। बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में संस्कृत एवं हिंदू अध्ययन विभाग स्थापित किए जाएं। इसके अलावा सरकारी मंत्रालयों और विभागों में संस्कृत अनुवादकों की नियुक्ति कर प्रशासनिक कार्यों में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। इससे राजकीय कार्यों में संस्कृत की भागीदारी बढ़ेगी और भाषा को व्यवहारिक स्वरूप मिलेगा।

अनुसंधान, अध्ययन पीठ और नई पीढ़ी पर रहेगा विशेष फोकस

विशेषज्ञों ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संवादात्मक संस्कृत शिक्षण केंद्र स्थापित करने, वैदिक ऋषियों और महान आचार्यों के नाम पर अध्ययन पीठों की स्थापना तथा संस्कृत के साथ पाली और प्राकृत भाषाओं के अध्ययन एवं शोध को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना था कि भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए शोध और नवाचार को बढ़ावा देना जरूरी है। बैठक में संस्कृत भाषा में फिल्म, वृत्तचित्र, वेब कंटेंट और अन्य डिजिटल सामग्री के निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया। साथ ही वरिष्ठ और सेवानिवृत्त संस्कृत आचार्यों के अनुभव का उपयोग ‘संस्कृत चूड़ामणि योजना’ के माध्यम से शोध, प्रशिक्षण और शास्त्र अध्ययन में करने की बात कही गई।

पर्वतीय क्षेत्रों के संस्कृत विद्यालयों पर विशेष ध्यान

उत्तराखंड राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में संचालित संस्कृत विद्यालयों एवं पाठशालाओं के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक शैक्षिक संसाधन उपलब्ध कराने और शिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर भी सहमति बनी। अंत में निर्णय लिया गया कि आयोग की संरचना, अधिकारों और कार्ययोजना को अंतिम रूप देने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगा। इस दौरान आयोग की कार्यप्रणाली और उसके दीर्घकालिक उद्देश्यों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि प्रस्तावित उत्तराखंड संस्कृत आयोग केवल एक संस्थागत व्यवस्था नहीं होगा, बल्कि यह संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।

 

 

 

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