उत्तराखंड

उत्तराखंड में मदरसों पर सरकार की सख्ती, नियम तोड़ने पर 5 लाख का जुर्माना और होगी तालाबंदी..

उत्तराखंड में मदरसों पर सरकार की सख्ती, नियम तोड़ने पर 5 लाख का जुर्माना और होगी तालाबंदी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की मान्यता, संचालन और निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाते हुए उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025 में संशोधन कर दिया है। राज्यपाल (लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.)) की मंजूरी के बाद उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू हो गया है। संशोधित प्रावधानों के तहत अब नियमों का उल्लंघन करने वाले मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के खिलाफ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार की ओर से किए गए संशोधन में अधिनियम की कुछ धाराओं में बदलाव करते हुए पहले से मौजूद अनुमोदन संबंधी प्रावधानों को हटाया गया है। पहले धारा-11 की उपधारा (3) के तहत अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम को उत्तराखंड बोर्ड की मंजूरी आवश्यक थी। इसी प्रकार धारा-12 की उपधारा (3) में भी बोर्ड के अनुमोदन का प्रावधान था। संशोधन अध्यादेश के जरिए अब इन दोनों शर्तों को समाप्त कर दिया गया है।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अधिनियम की धारा-16 में किया गया है, जिसमें नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के अधिकारों को और व्यापक बनाया गया है। पहले से मौजूद प्रावधानों के अनुसार यदि कोई संस्थान मान्यता संबंधी नियमों का उल्लंघन करता है या शुल्क, दान, अनुदान अथवा अन्य वित्तीय स्रोतों से प्राप्त धनराशि का दुरुपयोग करता है तो उसकी मान्यता समाप्त की जा सकती है। संशोधन के बाद धारा-16 में नया खंड-‘ग’ जोड़ा गया है। इसके तहत यदि किसी संस्थान द्वारा बिना वैध मान्यता के धार्मिक शिक्षा संचालित करने या अधिनियम की धारा-14 के प्रावधानों का उल्लंघन करने की जानकारी मिलती है, तो अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण जांच के बाद संबंधित संस्थान को सील या बंद कर सकेगा। इसके अलावा संस्थान के संचालकों पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। आवश्यक होने पर संस्थान के संचालन के लिए प्रशासक भी नियुक्त किया जा सकेगा। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार का आपराधिक कृत्य सामने आता है तो संबंधित कानूनों के तहत एफआईआर दर्ज कराने का भी अधिकार प्राधिकरण को दिया गया है। हालांकि किसी भी कार्रवाई से पहले संस्थान के संचालकों को अपना पक्ष रखने और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।

संशोधित कानून के तहत अब मान्यता प्राप्त करने के लिए संस्थानों को धारा-14 में निर्धारित सभी शर्तों का पालन अनिवार्य होगा। इसके अनुसार संस्थान का अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित होना जरूरी होगा। संस्थान का संबंधित परिषद या बोर्ड से संबद्ध होना, प्रबंधन करने वाली सोसाइटी का विधिवत पंजीकृत होना तथा संस्थान की भूमि उसी सोसाइटी, न्यास या कंपनी के नाम दर्ज होना आवश्यक होगा। इसके साथ ही सभी वित्तीय लेन-देन बैंक खाते के माध्यम से करना अनिवार्य रहेगा। प्रबंधन समिति में अधिकांश पद अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के पास होने चाहिए और संस्था का उद्देश्य संबंधित अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की सेवा होना चाहिए। संस्थान किसी भी छात्र या कर्मचारी को धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकेगा। साथ ही योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, सामाजिक एवं सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और कानून में निर्धारित अन्य मानकों का पालन करना भी आवश्यक होगा। सरकार का मानना है कि संशोधित कानून से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नियामक व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा। वहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ त्वरित और प्रभावी कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो गया है।

 

 

 

 

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