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कर्णप्रयाग विवाद के बाद बढ़ी हलचल, उत्तराखंड में निहंगों की एंट्री से प्रशासन अलर्ट..

कर्णप्रयाग विवाद के बाद बढ़ी हलचल, उत्तराखंड में निहंगों की एंट्री से प्रशासन अलर्ट..

 

 

उत्तराखंड: कर्णप्रयाग में हुए विवाद के बाद अब इसका असर राजधानी देहरादून तक दिखाई देने लगा है। हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से निहंगों का एक जत्था उत्तराखंड की ओर रवाना होने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए देर रात तक वरिष्ठ अधिकारी स्वयं सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे और राजधानी के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। सूत्रों के अनुसार गुरुवार को पांवटा साहिब में प्रशासनिक अधिकारियों और निहंग प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन किसी ठोस निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद निहंगों का जत्था कुल्हाल सीमा की ओर बढ़ा। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन बताया जा रहा है कि जत्थे के कुछ सदस्य वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करते हुए उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर गए। इस सूचना के बाद देहरादून पुलिस ने पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी।

संभावित गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए प्रेमनगर चौक, शिमला बाईपास, आईएसबीटी सहित कई प्रमुख मार्गों पर नाकेबंदी की गई। आने-जाने वाले वाहनों की गहन जांच की गई और विभिन्न थानों की पुलिस के साथ पीएसी के जवानों को भी संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया। पुलिस को आशंका थी कि अन्य निहंग जत्थे भी उत्तराखंड की ओर आ सकते हैं, जिसके चलते पूरी रात निगरानी अभियान जारी रहा। सघन जांच और सुरक्षा व्यवस्था के कारण कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। देर रात तक आम लोगों को ट्रैफिक जाम और धीमी आवाजाही जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस की शुरुआती रणनीति और खुफिया तंत्र की सक्रियता पर भी सवाल उठने लगे हैं। चर्चा इस बात की भी रही कि दिनभर सीमा पर निगरानी के बावजूद यदि जत्था वैकल्पिक मार्गों से आगे बढ़ गया, तो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों का दावा है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पांवटा साहिब में कई दौर की वार्ता, लेकिन नहीं निकला समाधान..

गुरुवार को पांवटा साहिब गुरुद्वारे में प्रशासन और निहंग प्रतिनिधियों के बीच लंबी वार्ता हुई। बैठक में विकासनगर के एसडीएम विनोद कुमार, तहसीलदार विवेक राजौरी, नायब तहसीलदार ग्यारुदत्त जोशी और एसपी देहात पंकज गैरोला समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कई चरणों तक चली बातचीत के बावजूद दोनों पक्ष किसी साझा समाधान पर नहीं पहुंच सके। निहंग प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं है। उनका दावा है कि कर्णप्रयाग में हुई घटना में दोनों पक्षों की भूमिका रही और मामले का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए। साथ ही उन्होंने कर्णप्रयाग प्रकरण में गिरफ्तार चार निहंगों की रिहाई की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक उनके साथियों को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वे वापस लौटने के लिए तैयार नहीं हैं।

क्या है पूरा कर्णप्रयाग विवाद?

16 जून को हेमकुंड साहिब यात्रा पर जा रहे निहंगों का कर्णप्रयाग में एक होटल के बाहर वाहन पार्किंग को लेकर स्थानीय होटल संचालक से विवाद हो गया था। देखते ही देखते कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि इस दौरान तलवारें भी चलीं, जिसमें कई स्थानीय लोग घायल हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव फैल गया और राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब तीन घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करते हुए तीन निहंगों को गिरफ्तार किया था। इसके कुछ दिन बाद चार अन्य निहंग रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन करने लगे। कई घंटों तक चली बातचीत के बाद पुलिस, प्रशासन और सिख प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनी, जिसके बाद 23 जून को मामला शांतिपूर्वक सुलझ गया और प्रदर्शन कर रहे निहंग वापस लौट गए।फिलहाल कर्णप्रयाग विवाद को लेकर पूरे प्रदेश में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। पुलिस लगातार सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ-साथ संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रही है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

 

 

 

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