उत्तराखंड

चारधाम यात्रा- 30 लाख श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण, GMVN में नौ करोड़ की बुकिंग..

चारधाम यात्रा- 30 लाख श्रद्धालुओं ने कराया पंजीकरण, GMVN में नौ करोड़ की बुकिंग..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में चल रही चारधाम यात्रा इस वर्ष नया इतिहास रचने की ओर बढ़ रही है। पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने दावा किया है कि बीते वर्षों की तुलना में इस बार यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है। यात्रा को लेकर देशभर के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है और लगातार पंजीकरण का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा को सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार की ओर से व्यापक तैयारियां की गई हैं। गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के विश्राम गृहों में 16 फरवरी से ऑनलाइन बुकिंग शुरू की गई थी और अब तक लगभग 9.9 लाख श्रद्धालुओं द्वारा बुकिंग कराई जा चुकी है। जीएमवीएन के विश्राम गृहों में अब तक करीब नौ करोड़ रुपये की बुकिंग दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।

उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से अब तक 30 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि नौ लाख से अधिक यात्री धामों में दर्शन भी कर चुके हैं। लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन और पर्यटन विभाग यात्रा व्यवस्थाओं को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। पर्यटन विभाग के अनुसार श्रद्धालु ऑनलाइन पंजीकरण के लिए http://registrationandtouristcare.uk.gov.in वेबसाइट या Tourist Care UK मोबाइल एप का उपयोग कर सकते हैं। वहीं ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा हरिद्वार, ऋषिकेश और विकासनगर में उपलब्ध कराई गई है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि यात्रा मार्गों पर बनाए गए क्यूआर कोड आधारित चेकपोस्ट पर प्रत्येक यात्री का पंजीकरण स्कैन किया जाएगा। बिना पंजीकरण वाले यात्रियों को आगे जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए 50 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों से हेल्थ स्क्रीनिंग सेंटर पर स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की गई है। साथ ही उन्होंने यात्रियों से धामों की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करने का भी आग्रह किया। पर्यटन मंत्री ने कहा कि चारधाम यात्रा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। ऐसे में सभी श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी है कि वे यात्रा के दौरान नियमों का पालन करें और धामों की गरिमा बनाए रखें।

 

 

 

 

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