उत्तराखंड में लगेगा 100 करोड़ का BESS सिस्टम..
JEM Energy को मिली बड़ी परियोजना..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र में बैटरी स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण परियोजना सामने आई है। जुपिटर वैगन्स लिमिटेड की एनर्जी बिजनेस यूनिट JEM Energy को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) की ओर से करीब 100 करोड़ रुपये की परियोजना मिली है। कंपनी ने यह प्रोजेक्ट टैरिफ-बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (TBCB) के क्लस्टर C में माधव इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के साथ साझेदारी करते हुए हासिल किया है। बोली प्रक्रिया में दोनों कंपनियों की साझेदारी L1 बिडर रही।
उत्तराखंड में लगेगा 41 MW/102.5 MWh का स्टोरेज सिस्टम
परियोजना के तहत उत्तराखंड में 41 MW/102.5 MWh क्षमता का स्टैंडअलोन बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बिजली को स्टोर करने और जरूरत के समय ग्रिड को उपलब्ध कराने की क्षमता को मजबूत करना है। ऊर्जा की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में बैटरी स्टोरेज सिस्टम की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह परियोजना राज्य के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल में भी मिला बड़ा BESS प्रोजेक्ट
JEM Energy को उत्तराखंड के साथ पश्चिम बंगाल में भी एक बड़ी परियोजना मिली है। पश्चिम बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (WBSEDCL) ने उत्तर 24 परगना के जीरत स्थित 132 kV सबस्टेशन पर 50 MW/200 MWh क्षमता के BESS प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) जारी किया है। दोनों परियोजनाओं से कंपनी की एनर्जी स्टोरेज क्षेत्र में मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है।
BESS कारोबार को बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी
कंपनी के प्रबंध निदेशक विवेक लोहिया के मुताबिक, इन परियोजनाओं को एनर्जी स्टोरेज कारोबार के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 तक करीब 1,000 करोड़ रुपये की BESS ऑर्डर बुक तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही कंपनी ने JEM के EBITDA प्रदर्शन को लेकर भी लक्ष्य तय किए हैं। कंपनी को उम्मीद है कि JEM वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही तक EBITDA के स्तर पर सकारात्मक स्थिति में आ सकता है और वित्त वर्ष 2028 तक पूरी तरह लाभ की स्थिति हासिल कर सकता है। जुपिटर वैगन्स का पारंपरिक कारोबार रेलवे और मोबिलिटी से जुड़ा रहा है। अब कंपनी ऊर्जा भंडारण जैसे तेजी से उभरते क्षेत्र में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दे रही है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III के तहत सबस्टेशन स्तर पर स्टोरेज क्षमता बढ़ाने की जरूरत के बीच उत्तराखंड की यह परियोजना कंपनी की इस विस्तार रणनीति का हिस्सा है। बैटरी स्टोरेज के जरिए बिजली व्यवस्था को अधिक लचीला बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

