उत्तराखंड

न्यूनतम वेतन 26 हजार करने से MSP गारंटी तक की मांग, मजदूर-किसानों ने किया प्रदर्शन..

न्यूनतम वेतन 26 हजार करने से MSP गारंटी तक की मांग, मजदूर-किसानों ने किया प्रदर्शन..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर मजदूरों और किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी देहरादून के माध्यम से ज्ञापन भेजा। संगठनों ने मांगों पर जल्द कार्रवाई किए जाने की अपील की। प्रदर्शन के दौरान श्रमिकों, किसानों, पेंशन और रोजगार से जुड़े कई मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। संगठनों ने कहा कि मजदूरों और किसानों से जुड़े लंबित मामलों पर सरकार को तत्काल निर्णय लेना चाहिए।

26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग

ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने सभी श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 26 हजार रुपये करने की मांग की। इसके अलावा योजना श्रमिकों और दिहाड़ी मजदूरों की मजदूरी बढ़ाकर 42 हजार रुपये करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग भी रखी गई।संगठनों ने श्रमिकों के लिए आठ घंटे का कार्यदिवस, कार्यस्थल पर सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा, ट्रेड यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी जैसे अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने निश्चित अवधि के रोजगार की व्यवस्था खत्म करने की भी मांग उठाई।

सभी फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी

किसान संगठनों ने सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और सरकारी खरीद की गारंटी देने की मांग की।

इसके साथ ही किसानों और दलित समुदाय के लिए व्यापक कर्ज माफी, कृषि संसाधनों से जुड़े कानूनों के प्रभावी पालन और कृषि क्षेत्र को सहकारी समितियों के माध्यम से आधुनिक बनाने की मांग की गई।

किसान संगठनों ने कृषि आधारित उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र और सहकारी क्षेत्र के माध्यम से मजबूत करने पर भी जोर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने विद्युत संशोधन विधेयक 2025 वापस लेने की मांग की। बिजली क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने के साथ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सरकारी सेवाओं के निजीकरण, विनिवेश और बिक्री पर भी रोक लगाने की मांग ज्ञापन में शामिल रही।

संगठनों ने आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी व्यवस्था पर रोक लगाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के कथित व्यावसायिक दोहन को रोकने की मांग भी उठाई।

मनरेगा में 200 दिन काम की मांग

ग्रामीण रोजगार को लेकर प्रदर्शनकारियों ने मनरेगा को मजबूत करने की मांग की। उन्होंने साल में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये दैनिक मजदूरी के साथ योजना को बहाल करने की मांग रखी।

इसके अलावा विभिन्न व्यापार समझौतों को रद्द करने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से सरकार के सामने रखी गई।

OPS बहाली और EPS-95 बढ़ाने की मांग

कर्मचारी और श्रमिक संगठनों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था (OPS) बहाल करने की मांग की। इसके साथ ही EPS-95 के तहत पेंशन में बढ़ोतरी और सभी के लिए सार्वभौमिक पेंशन व्यवस्था लागू करने की मांग भी की गई।

संगठनों ने EPF से जुड़े नियमों में भी बदलाव की मांग रखी। इसमें एक साल से कम सेवा वाले कर्मचारियों को भी EPF एडवांस निकालने की सुविधा देने, PF दावों का समयबद्ध निस्तारण और ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन PF दावा स्वीकार करने की व्यवस्था शामिल है।

EPF रिकॉर्ड में बदलाव की सुविधा की मांग

प्रदर्शनकारियों ने UAN से जुड़े व्यक्तिगत विवरणों में आधार सत्यापन के जरिए स्वयं संशोधन करने की सुविधा देने की मांग की। इसमें नाम, जन्मतिथि, पिता या पति का नाम, नियुक्ति और सेवा समाप्ति की तारीख समेत अन्य विवरण शामिल हैं। इसके अलावा NCP दिनों को दर्ज और संशोधित करने की सुविधा देने, PF निकासी की पुरानी व्यवस्था बहाल करने और फॉर्म 10-C ऑनलाइन भरने की सुविधा दोबारा शुरू करने की मांग भी उठाई गई।

संगठनों ने उत्तराखंड में पेपर लीक मामलों को लेकर हुए आंदोलनों के दौरान गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मजदूरों, किसानों और कर्मचारियों से जुड़े इन मुद्दों पर केंद्र सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए जल्द आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top