उत्तराखंड

उत्तराखंड में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा कड़ी, अपॉइंटमेंट के बिना प्रवेश बंद..

उत्तराखंड में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा कड़ी, अपॉइंटमेंट के बिना प्रवेश बंद..

 

 

उत्तराखंड: प्रदेश में सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। हाल ही में एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद प्रशासनिक तंत्र की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बीच यह निर्णय लिया गया। सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पूरे राज्य में एक समान सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की रूपरेखा तैयार की गई है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी अधिकारी से मिलने से पहले पूर्व अनुमति या अपॉइंटमेंट लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति किसी भी व्यक्ति को कार्यालय परिसर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। सभी प्रमुख सरकारी दफ्तरों में डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जाएगा, जिससे आगंतुकों का पूरा रिकॉर्ड रखा जा सके। कौन, कब और किस उद्देश्य से कार्यालय आया। सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कार्यालय परिसरों में अलार्म सिस्टम लगाए जाएंगे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव हो सके। प्रवेश और गतिविधियों पर निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकी उपायों को भी शामिल किया जा रहा है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों से मुलाकात के दौरान भीड़ को पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा। एक समय में किसी अधिकारी से अधिकतम दो व्यक्ति ही मिल सकेंगे। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ भी अधिकतम तीन लोगों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। विशेष बात यह है कि वीआईपी भी अपने सुरक्षाकर्मियों को अधिकारी के कक्ष तक साथ नहीं ले जा सकेंगे। नई एसओपी में दफ्तरों के भीतर अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। दुर्व्यवहार, अभद्र भाषा या किसी भी प्रकार की धमकी की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही ज्वलनशील पदार्थ, हथियार, लाठी-डंडा या किसी भी प्रकार की खतरनाक वस्तु को कार्यालय परिसर में ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकारी दफ्तरों में निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्ड तैनात करने की प्रक्रिया को भी नियंत्रित किया गया है। अब किसी भी निजी सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति से पहले संबंधित विभाग के सचिव की अनुमति अनिवार्य होगी। सरकार का मानना है कि इन उपायों से सरकारी दफ्तरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण मिलेगा तथा प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान की संभावनाएं कम होंगी।

 

 

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