उत्तराखंड

केदारनाथ यात्रा 2026- घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण अनिवार्य, बीमा दर बढ़ने से नाराज संचालक..

केदारनाथ यात्रा 2026- घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण अनिवार्य, बीमा दर बढ़ने से नाराज संचालक..

 

 

 

 

उत्तराखंड: केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खुलने जा रहे हैं और इसके साथ ही प्रशासन ने यात्रा व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी केदारनाथ पैदल मार्ग पर हजारों श्रद्धालु घोड़ा-खच्चरों के माध्यम से यात्रा करते हैं। ऐसे में यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पशु कल्याण मानकों के अनुरूप संचालित करने के लिए घोड़ा-खच्चरों के पंजीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। पशुपालन विभाग ने 26 से 28 फरवरी तक पहले चरण के पंजीकरण शिविरों का रोस्टर जारी किया है। अलग-अलग स्थानों पर शिविर आयोजित कर घोड़ा-खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण, माइक्रो चिपिंग, टैगिंग और रक्त सैंपलिंग की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार होली के बाद दूसरे चरण का रोस्टर भी जारी किया जाएगा, ताकि जो संचालक पहले चरण में पंजीकरण नहीं करा पाए हैं, उन्हें भी अवसर मिल सके।

जिला प्रशासन ने इस वर्ष लगभग पांच हजार घोड़ा-खच्चरों के संचालन की अनुमति देने की तैयारी की है। हालांकि स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण और पशु स्वास्थ्य बीमा के किसी भी पशु को लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आशीष रावत के अनुसार सभी घोड़ा-खच्चरों का चिकित्सीय परीक्षण अनिवार्य है, जिससे यात्रा मार्ग पर किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। माइक्रो चिपिंग के माध्यम से प्रत्येक पशु की पहचान सुनिश्चित की जा रही है, ताकि अनियमितताओं पर निगरानी रखी जा सके। वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ऊखीमठ डॉ सतेंद्र सिंह यादव और रुद्रप्रयाग के डाॅ राजीव गोयल ने बताया कि राउंलेक क्षेत्र में लगभग 300 घोड़ा-खच्चरों का स्वास्थ्य परीक्षण और माइक्रो चिपिंग पूरी कर ली गई है, लेकिन स्वास्थ्य बीमा जमा न होने के कारण अभी तक लाइसेंस जारी नहीं किए गए हैं।

वहीं मनसूना क्षेत्र में 172 घोड़ा-खच्चरों का परीक्षण किया गया, जिनमें से 143 का स्वास्थ्य बीमा पूर्ण होने के बाद पंजीकरण कर लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। शेष पशुओं के बीमा और औपचारिकताओं की प्रक्रिया जारी है। इस बीच बीमा शुल्क में बढ़ोतरी को लेकर घोड़ा-खच्चर संचालकों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। स्थानीय संचालकों का कहना है कि इस बार बीमा प्रीमियम में दोगुने से अधिक वृद्धि की गई है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई संचालकों का तर्क है कि बीमा को अनिवार्य करने के बजाय स्वैच्छिक रखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि छोटे और सीमित आय वाले संचालकों के लिए बढ़ी हुई बीमा राशि जमा करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

प्रशासन का पक्ष है कि यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीमा व्यवस्था से दुर्घटना या आपात स्थिति में राहत और क्षतिपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से आवश्यक है और बिना बीमा के संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रा सीजन के दौरान केदारनाथ पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर सेवा स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। हजारों परिवार इसी पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में प्रशासन संतुलन बनाने की कोशिश में है, एक ओर सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना, तो दूसरी ओर स्थानीय संचालकों की समस्याओं का समाधान निकालना। विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर शिविर लगा रही हैं और संचालकों को समय रहते सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। यात्रा प्रारंभ होने में अभी समय है, लेकिन प्रशासन की मंशा है कि कपाट खुलने से पहले सभी पात्र घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और बीमा प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, ताकि इस वर्ष की केदारनाथ यात्रा सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु रूप से संचालित हो सके।

 

 

 

 

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