उड़ान योजना पर सवाल, मुनस्यारी हेली सेवा में कम दूरी पर महंगा किराया..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की उड़ान योजना के तहत कई दुर्गम और सीमांत क्षेत्रों को हेलीकॉप्टर सेवा से जोड़ा गया था। इसी योजना के अंतर्गत करीब दो वर्ष पहले विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी के लिए हेली सेवा शुरू की गई थी। शुरुआत में इसे स्थानीय लोगों और पर्यटन कारोबार के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा गया, लेकिन समय बीतने के साथ यह सेवा अब अपने बढ़ते और असमान किराये को लेकर विवादों में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदेश में संचालित अन्य हेली और हवाई सेवाओं की तुलना में मुनस्यारी रूट का किराया सबसे अधिक है, जबकि उड़ान की दूरी और समय लगभग समान है। इससे उड़ान योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। योजना का मकसद जहां दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को सस्ती और सुगम हवाई सुविधा उपलब्ध कराना था, वहीं मुनस्यारी के लिए तय किया गया महंगा किराया आम लोगों की पहुंच से बाहर होता जा रहा है।
मुनस्यारी के लिए चल रही हेली सेवा का किराया अब तक दो बार बढ़ाया जा चुका है। सेवा के उद्घाटन के समय हल्द्वानी से मुनस्यारी तक लगभग 35 मिनट की उड़ान के लिए प्रति यात्री किराया 3625 रुपये निर्धारित किया गया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में पहले इसे बढ़ाकर 4200 रुपये किया गया और फिर कुछ समय बाद किराया बढ़ाकर 5250 रुपये कर दिया गया। लगातार बढ़ोतरी से न केवल स्थानीय निवासी बल्कि पर्यटक और कारोबारी भी नाराज नजर आ रहे हैं। हेली सेवा के नियमों के अनुसार हल्द्वानी से मुनस्यारी की उड़ान में प्रति यात्री 75 किलो तक वजन और 5 किलो सामान तय किराये में शामिल है। तय सीमा से अधिक वजन होने पर प्रति किलो 100 रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है। हालांकि, अन्य रूटों के किराये पर नजर डालें तो मुनस्यारी का किराया कहीं अधिक नजर आता है। हल्द्वानी से पिथौरागढ़ तक करीब 50 मिनट की उड़ान के लिए 4200 रुपये किराया तय है, जबकि नौकुचियाताल से देहरादून तक 50 मिनट की उड़ान 3675 रुपये में उपलब्ध है। इसी तरह अल्मोड़ा से पिथौरागढ़ तक मात्र 30 मिनट की हवाई यात्रा के लिए यात्रियों को केवल 1575 रुपये चुकाने होते हैं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि किराये में यह अंतर क्षेत्रीय संतुलन के सिद्धांत के खिलाफ है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया का कहना है कि मुनस्यारी जैसे सीमांत क्षेत्र के लोगों के लिए सड़क मार्ग से यात्रा पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में जब हेली सेवा भी महंगी हो जाए, तो आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने सरकार से किराये की समीक्षा कर समान नीति लागू करने की मांग की है। पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि मुनस्यारी के लिए महंगा किराया सीधे तौर पर पर्यटन को प्रभावित कर रहा है। मुनस्यारी होटल एसोसिएशन से जुड़े व्यवसायी देवेन्द्र सिंह का कहना है कि यदि अन्य रूटों की तरह मुनस्यारी के लिए भी किफायती किराया तय किया जाए तो पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। इससे न केवल होटल और होमस्टे व्यवसाय को लाभ मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
वहीं, हेली सेवा संचालित करने वाली कंपनी हेरिटेज एविएशन का कहना है कि किराये की दरें कंपनी अपने स्तर पर तय नहीं करती। कंपनी के जनरल मैनेजर मनीष भंडारी के अनुसार हेली सेवा के किराये केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और कंपनी प्रति यात्री बहुत सीमित मार्जिन पर सेवा संचालित कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि परिचालन लागत, मौसम और पहाड़ी परिस्थितियों को देखते हुए किराये में ज्यादा बदलाव संभव नहीं है। फिलहाल मुनस्यारी की हेली सेवा को लेकर उठे सवाल अब प्रशासन और सरकार तक पहुंचने लगे हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटन कारोबारियों को उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करेगी और किराये में असमानता को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाएगी। यदि समय रहते इस दिशा में निर्णय नहीं लिया गया, तो उड़ान योजना का मूल उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों तक सस्ती और सुगम हवाई सेवा पहुंचाने का सपना अधूरा रह सकता है।
हेली सेवा के किराये की सूची
देहरादून से बागेश्वर- 45 मिनट 3675 रुपए
हल्द्वानी से पिथौरागढ़- 50 मिनट 4200 रुपए
पिथौरागढ़ से मुनस्यारी- 30 मिनट 2625 रुपए
अल्मोड़ा से पिथौरागढ़- 30 मिनट 1575 रुपए
हल्द्वानी से अल्मोड़ा-30 मिनट 2625 रुपए
देहरादून से टिहरी-15 मिनट 2100 रुपए
देहरादून से श्रीनगर-14 मिनट 1050 रुपए
हल्द्वानी से मुनस्यारी-35 मिनट 5250 रुपए