उत्तराखंड की ऊर्जा परियोजनाओं को गति देने की पहल, केंद्रीय मंत्री से मिले सीएम धामी..
उत्तराखंड: उत्तराखंड की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और भविष्य की बिजली मांग को देखते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान सीएम ने जल विद्युत परियोजनाओं, पम्प स्टोरेज योजनाओं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) और ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार के लिए केंद्र सरकार से विशेष वित्तीय सहयोग और आवश्यक स्वीकृतियां देने का आग्रह किया। सीएम ने कहा कि उत्तराखंड एक जल विद्युत क्षमता से समृद्ध हिमालयी राज्य है, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों और परियोजनाओं की लागत को देखते हुए इसे विशेष वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि पूर्वोत्तर राज्यों की तरह उत्तराखंड को भी जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए विशेष वित्तीय पैकेज उपलब्ध कराया जाए, जिससे राज्य अपनी ऊर्जा क्षमता का बेहतर उपयोग कर सके।
अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग
बैठक में सीएम ने आगामी महीनों में राज्य की बढ़ती बिजली मांग का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार एल-नीनो जैसी परिस्थितियों और मानसून की संभावित कमी के कारण जलाशयों में जलस्तर घट सकता है। इसका सीधा असर जल विद्युत उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। सीएम ने कहा कि दूसरी ओर चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा और पर्यटन गतिविधियों के कारण राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने जुलाई माह की शेष अवधि के लिए केंद्रीय पूल से 150 मेगावाट तथा अगस्त माह के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
पम्प स्टोरेज परियोजनाओं के लिए मांगी 7,800 करोड़ रुपये की सहायता
उत्तराखंड में भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सीएम ने लगभग 10 गीगावाट क्षमता वाली पम्प स्टोरेज परियोजनाओं के विकास का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने इन परियोजनाओं के लिए अगले पांच वर्षों में केंद्र सरकार से 7,800 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का आग्रह किया। सीएम ने कहा कि पम्प स्टोरेज परियोजनाएं न केवल बिजली उत्पादन को स्थिर बनाएंगी, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और राष्ट्रीय ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। बैठक में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने केंद्र से अनुरोध किया कि उत्तराखंड के लिए स्वीकृत 500 मेगावाट की बैटरी स्टोरेज क्षमता को बढ़ाकर 665 मेगावाट किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने बढ़ी हुई क्षमता के अनुरूप आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग रखी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ने से बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी और भविष्य में बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
3638 करोड़ रुपये की ट्रांसमिशन परियोजना को मंजूरी देने की मांग
सीएम धामी ने पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की एशियाई विकास बैंक (एडीबी) सहायता प्राप्त 3,638.26 करोड़ रुपये की ट्रांसमिशन परियोजना का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए लगभग 2,910.61 करोड़ रुपये का एडीबी ऋण प्रस्तावित है। राज्य सरकार चाहती है कि परियोजना के लिए ऋण और राज्यांश का वित्तीय पैटर्न पूर्व की तरह 80:20 अनुपात में ही रखा जाए। मुख्यमंत्री का कहना था कि यदि इस व्यवस्था में बदलाव कर एडीबी की हिस्सेदारी घटाई जाती है तो उत्तराखंड जैसे विशेष श्रेणी के पर्वतीय राज्य को मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण परियोजना को तकनीकी रूप से उपयुक्त मान चुका है और विद्युत मंत्रालय ने भी एडीबी की सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। ऐसे में परियोजना को शीघ्र स्वीकृति मिलना राज्य के बिजली ढांचे को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
केंद्र ने दिया सकारात्मक आश्वासन
बैठक के अंत में केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करने और आवश्यक स्तर पर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया। माना जा रहा है कि यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो उत्तराखंड की ऊर्जा क्षमता, बिजली आपूर्ति व्यवस्था और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा को बड़ा बल मिलेगा। साथ ही राज्य में जल विद्युत और ऊर्जा अवसंरचना से जुड़ी कई परियोजनाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है।