उत्तराखंड

परिवार रजिस्टर विवाद- सीएम धामी ने दिए सख्त निर्देश, सभी जिलों में निष्पक्ष जांच..

परिवार रजिस्टर विवाद- सीएम धामी ने दिए सख्त निर्देश, सभी जिलों में निष्पक्ष जांच..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में परिवार/कुटुंब रजिस्टरों को लेकर सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में पूरे प्रदेश में व्यापक, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि गड़बड़ियों में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। सीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार एवं कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारी के संरक्षण में सुरक्षित रखी जाएं, ताकि अभिलेखों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

इसके साथ ही यह निर्णय लिया गया कि परिवार रजिस्टरों की विस्तृत और तकनीकी जांच CDO और ADM स्तर के अधिकारियों द्वारा कराई जाएगी, जिससे प्रविष्टियों की सत्यता और वैधानिकता की गहन पड़ताल हो सके। सीएम ने कहा कि यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक है। इस प्रक्रिया से न केवल अनियमितताओं की पहचान होगी, बल्कि भविष्य में परिवार रजिस्टर व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद और सुव्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

परिवार और कुटुंब रजिस्टरों में सामने आ रही गड़बड़ियों को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक में जांच को लेकर अहम फैसले लिए गए। तय किया गया है कि जांच प्रक्रिया का दायरा वर्ष 2003 से लेकर वर्तमान समय तक रहेगा, जिससे बीते वर्षों में की गई किसी भी प्रकार की संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान की जा सके।बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमों के अनुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सीएम ने यह भी जानकारी दी कि परिवार रजिस्टर से जुड़ा पंजीकरण और प्रतिलिपि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के तहत संचालित होती है। इस नियमावली के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार या कुटुंब रजिस्टर में दर्ज किया जाना अनिवार्य है। सरकार ने यह भी संकेत दिए कि मौजूदा प्रविष्टियों के शुद्धिकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया को अब और अधिक कठोर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परिवार रजिस्टर पूरी तरह सही, प्रमाणिक और भरोसेमंद रहें। इन फैसलों से न केवल अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा, बल्कि भविष्य में परिवार रजिस्टर प्रणाली को मजबूत और विवाद‑रहित बनाया जा सकेगा।

उत्तराखंड सरकार ने परिवार रजिस्टर से जुड़े अधिकार और प्रक्रियाओं को और स्पष्ट करने के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले लिए। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) के पास है, जबकि इस संबंध में किसी विवाद या आपत्ति पर अपील का अधिकार उप-जिलाधिकारी (SDM) के पास निहित रहेगा। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सभी सेवाओं को अपणी सरकार पोर्टल के माध्यम से आम जनता के लिए और अधिक सुलभ बनाया जाए।

बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि राज्य की सीमा से लगे मैदानी जनपदों के ग्रामीण इलाकों में पिछले वर्षों में हुई अनधिकृत बसावट के कारण परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होने से जनसांख्यिकीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका रही है। इसी पृष्ठभूमि में अधिकारियों ने सुझाव दिया कि परिवार रजिस्टर नियमावली में आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि प्रविष्टियों की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, कानूनी और नियंत्रित बन सके।

पंचायती राज विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए ताजा आंकड़ों से यह सामने आया है कि वर्ष 2025 के दौरान प्रदेश में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाओं को लेकर भारी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। 1 अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 की अवधि में नए परिवारों को रजिस्टर में शामिल करने के लिए कुल 2,66,294 आवेदन दर्ज किए गए। इनमें से 2,60,337 आवेदनों को सभी मानकों पर सही पाए जाने के बाद स्वीकृति दी गई, जबकि 5,429 आवेदन नियमों के अनुरूप न होने और आवश्यक दस्तावेज पूरे न होने के कारण खारिज कर दिए गए। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त किए गए आवेदनों की संख्या इस ओर संकेत करती है कि फर्जी या संदिग्ध प्रविष्टियों की कोशिशें भी सामने आई हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने परिवार रजिस्टर से संबंधित प्रक्रिया को और अधिक कठोर, तकनीकी और पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है। आने वाले समय में सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत किया जाएगा, ताकि केवल वास्तविक और पात्र परिवारों के नाम ही रजिस्टर में दर्ज हों। सरकार का उद्देश्य है कि परिवार रजिस्टर प्रणाली पूरी तरह भरोसेमंद बने और किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।

परिवार रजिस्टर से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया है कि जांच प्रक्रिया में किसी भी जिले या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों सहित पूरे प्रदेश में एक समान और निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही की गुंजाइश न रहे। सीएम ने यह भी कहा कि भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को स्पष्ट और सुव्यवस्थित नीति के तहत नियंत्रित किया जाएगा।

इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे नियमों को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। बैठक में सीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारी अभिलेखों से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस उच्चस्तरीय बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी (इंटेलिजेंस) अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायती राज डॉ. पराग धकाते और निदेशक पंचायती राज निधि यादव सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाने और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति रोकने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

 

 

 

 

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