उत्तराखंड राजभवन में होगा बदलाव, डॉ. ढाल सिंह बिसेन को बनाया गया नया राज्यपाल..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में राज्यपाल के पद पर बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छह राज्यों में नए राज्यपालों की नियुक्ति की है। इस फेरबदल के तहत मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। अब तक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह इस पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। वहीं, उत्तराखंड भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है। बिसेन की नियुक्ति के बाद प्रदेश के संवैधानिक पद पर नई जिम्मेदारी संभालने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, जनसेवा के प्रति समर्पण और सार्वजनिक जीवन में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिसेन ने मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री, सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता के रूप में जनहित से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीएम ने उम्मीद जताई कि डॉ. बिसेन के अनुभव और मार्गदर्शन से उत्तराखंड की विकास यात्रा को नई दिशा मिलेगी। उनके अनुसार, राज्य में सुशासन, जनकल्याण और विकास से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाने में उनका अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव
डॉ. ढाल सिंह बिसेन का राजनीतिक सफर मध्य प्रदेश से जुड़ा रहा है। उनका जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ था। वह पेशे से आयुर्वेद एवं होम्योपैथी के चिकित्सक होने के साथ किसान भी रहे हैं। भाजपा में लंबे समय से सक्रिय बिसेन ने प्रदेश की राजनीति में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह बरघाट विधानसभा सीट से चार बार विधायक चुने गए। वर्ष 2003 से 2005 के बीच उन्होंने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम किया। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव के चलते प्रदेश की राजनीति में उनकी पहचान एक वरिष्ठ नेता के रूप में रही है। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर मध्य प्रदेश की बालाघाट संसदीय सीट से जीत दर्ज की थी। इसके बाद वह 17वीं लोकसभा के सदस्य बने और वर्ष 2024 तक सांसद रहे। विधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री और सांसद तक की जिम्मेदारियां निभाने के बाद अब उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ी होगी। उत्तराखंड में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उनके अनुभव और कार्यशैली पर राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र की नजर रहेगी।
गुरमीत सिंह की जगह संभालेंगे जिम्मेदारी
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने 15 सितंबर 2021 को उत्तराखंड के आठवें राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उनके कार्यकाल के दौरान राज्य के विभिन्न सामाजिक, शैक्षिक और सामरिक विषयों पर उनकी सक्रियता चर्चा में रही। अब राष्ट्रपति की ओर से की गई नई नियुक्ति के बाद डॉ. ढाल सिंह बिसेन उनकी जगह राज्यपाल की जिम्मेदारी संभालेंगे। राज्यपाल का पद संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। विधानसभा से पारित विधेयकों, संवैधानिक प्रक्रियाओं और राज्य सरकार से संबंधित कई मामलों में राज्यपाल की भूमिका निर्धारित होती है। ऐसे में नए राज्यपाल की नियुक्ति प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था के लिहाज से अहम है।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब उत्तराखंड में विकास योजनाओं, पर्यटन, आधारभूत सुविधाओं और जनकल्याण से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण बने हुए हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने उनके अनुभव से राज्य को लाभ मिलने की उम्मीद जताई है। अब नए राज्यपाल के कार्यभार संभालने के बाद उनकी प्राथमिकताओं और संवैधानिक जिम्मेदारियों को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी। मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबा अनुभव रखने वाले बिसेन के सामने उत्तराखंड की परिस्थितियों और राज्य की जरूरतों के अनुरूप अपनी नई भूमिका निभाने की जिम्मेदारी होगी।
राज्यपालों की नियुक्ति में भाजपा नेता दुष्यंत गौतम को सिक्किम की जिम्मेदारी दी गई है। गौतम उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश प्रभारी रह चुके हैं और पार्टी संगठन में विभिन्न भूमिकाएं निभा चुके हैं। उत्तराखंड में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने के कारण वह राज्य की राजनीति से भी परिचित रहे हैं। राष्ट्रपति की ओर से किए गए इस फेरबदल में अन्य राज्यों के राज्यपालों की नियुक्तियां भी शामिल हैं। इस बदलाव के साथ उत्तराखंड और सिक्किम सहित कई राज्यों में राजभवन की जिम्मेदारियों में परिवर्तन होगा।

