उत्तराखंड

उपनल कर्मियों के कॉन्ट्रैक्ट में देरी पड़ी भारी, मुख्य सचिव ने विभागाध्यक्षों को दी चेतावनी..

उपनल कर्मियों के कॉन्ट्रैक्ट में देरी पड़ी भारी, मुख्य सचिव ने विभागाध्यक्षों को दी चेतावनी..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड सरकार ने उपनल कर्मियों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामलों के निस्तारण को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित सचिव समिति की बैठक में सभी विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए कि उनके विभागों में कार्यरत उपनल कर्मियों के साथ अगले तीन दिनों के भीतर अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) की प्रक्रिया हर हाल में पूरी की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर अनुबंध नहीं करने वाले विभागाध्यक्षों के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि (नेगेटिव रिमार्क) दर्ज की जाएगी। बैठक में प्रशासनिक कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि शासन की प्राथमिकता केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने विभागाध्यक्षों से कहा कि उपनल कर्मियों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उपनल कर्मियों के अनुबंध को लेकर सख्त निर्देश

मुख्य सचिव ने कहा कि विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में उपनल कर्मी लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, इसलिए उनके साथ अनुबंध की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब उचित नहीं है। उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया कि वे व्यक्तिगत रूप से इस कार्य की निगरानी करें और तीन दिन के भीतर अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने की रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई विभाग निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं करता है तो संबंधित विभागाध्यक्ष की जवाबदेही तय की जाएगी और उनके सेवा अभिलेख में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में कर्मचारियों की पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि पूर्व में जारी शासनादेश का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए और पात्र कर्मचारियों की पदोन्नति में किसी प्रकार की देरी न हो। उन्होंने कहा कि 30 जून 2027 तक पदोन्नति के पात्र कर्मचारियों के मामलों की प्रक्रिया अगले एक माह के भीतर शुरू कर दी जाए, ताकि समयबद्ध तरीके से सभी औपचारिकताएं पूरी की जा सकें। उनका कहना था कि समय पर पदोन्नति मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है और प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार आता है।मुख्य सचिव ने अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (एसीआर) से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए विभागों को लंबित एसीआर कार्य तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग पहले एसीआर बैच क्रिएशन का कार्य पूरा करें और उसके बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी एसीआर प्रक्रिया संपन्न कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि एसीआर में देरी का सीधा असर पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी मामलों पर पड़ता है, इसलिए इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

कृषि और उद्यान विभाग की योजनाओं में लागू होगी सीबीडीसी

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) के उपयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की कुछ योजनाओं में डिजिटल करेंसी आधारित भुगतान व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसे देखते हुए अब उद्यान विभाग और कृषि विभाग की अन्य लाभार्थी आधारित योजनाओं में भी सीबीडीसी लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इसके लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित करने और चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही निर्देश दिए कि लाभार्थी आधारित योजनाओं का संचालन करने वाले अन्य विभागों में भी सीबीडीसी लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए।मुख्य सचिव ने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। इसके लिए लाभार्थी आधारित योजनाओं से जुड़े सभी विभागों के साथ सीबीडीसी पर विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी, ताकि अधिकारी और कर्मचारी नई व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझ सकें और योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सके।

समयबद्ध कार्य संस्कृति पर सरकार का जोर

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि शासन स्तर पर लंबित मामलों का नियमित रूप से निस्तारण किया जाए और प्रत्येक कार्य तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्य संस्कृति को प्रशासन की प्राथमिकता बनाया जाए, ताकि आम जनता को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ बिना किसी अनावश्यक देरी के मिल सके। सरकार का मानना है कि उपनल कर्मियों के अनुबंध, कर्मचारियों की पदोन्नति, एसीआर प्रक्रिया और डिजिटल भुगतान व्यवस्था जैसे विषयों पर समयबद्ध कार्रवाई से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी अधिक पारदर्शिता और दक्षता आएगी।

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