चंपावत दौरे पर सीएम धामी, 182 करोड़ की 23 योजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास..
उत्तराखंड: सीएम पुष्कर सिंह धामी मंगलवार को चंपावत जिले के तल्ला देश बमन (सीम चुका) क्षेत्र पहुंचे, जहां उन्होंने क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले प्रसिद्ध मां रणकोची मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। सीएम के मंदिर पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने पारंपरिक तरीके से उनका स्वागत किया। मंदिर दर्शन के उपरांत आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में सीएम ने जिले के विकास को नई गति देते हुए कुल 182 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 23 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। इन योजनाओं में सड़क, आधारभूत ढांचे, पेयजल और जनसुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं, जिनसे क्षेत्र के दूरस्थ इलाकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। इस अवसर पर सीएम धामी ने रणकोची मंदिर के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए साढ़े चार करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत किए जाने की घोषणा की।
उन्होंने कहा कि इस कार्य की पहली किस्त शासन द्वारा पहले ही जारी की जा चुकी है, जिससे जल्द ही मंदिर परिसर के विकास कार्य प्रारंभ किए जाएंगे। सीएम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ उन्हें पर्यटन के रूप में भी विकसित करना है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें। चंपावत दौरे के बाद सीएम धामी शाम को खटीमा पहुंचे। यहां उन्होंने तराई बीज निगम मैदान में कुमाऊं सांस्कृतिक उत्थान समिति द्वारा आयोजित प्रसिद्ध उत्तरायणी कौतिक मेले का विधिवत शुभारंभ किया। सीएम ने मेले का भ्रमण कर स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का अवलोकन किया। सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तरायणी मेला कुमाऊं की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है और ऐसे आयोजन हमारी लोक संस्कृति, परंपराओं और विरासत को संजोए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
उत्तरायणी पर्व के अवसर पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत जिले के तल्ला देश क्षेत्र में आयोजित धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागिता की। सीएम ने पारंपरिक कलश यात्रा में शामिल होकर श्रद्धालुओं के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। इसके पश्चात उन्होंने प्रसिद्ध मां रणकोची मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान सीएम धामी ने मंदिर के पुजारी वर्ग को अंगवस्त्र और धार्मिक ग्रंथ भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही भजन-कीर्तन से जुड़ा आवश्यक सामग्री भी वितरित की गई। सीएम ने रियासी, बमन गांव, तोक खेत सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में प्रतिभाग कर आमजन से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र और सहायता सामग्री वितरित की गई। सीएम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
जनसभा को संबोधित करते हुए सीएम पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत जिले को आदर्श जिला के रूप में विकसित करने की दिशा में 7 महत्वपूर्ण विकास कार्यों की घोषणाएं कीं। इनमें सीम खेत चुका एवं सौराई क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा कार्य, तल्ला देश क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों का सौंदर्यीकरण, पूर्णागिरी मेला 2026 के सुचारु संचालन के लिए शासन की ओर से ढाई करोड़ रुपये की धनराशि उपलब्ध कराना, चंपावत विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न मोटर मार्गों का डामरीकरण कार्य, जिला चिकित्सालय चंपावत में निर्माणाधीन क्रिटीकल यूनिट में लिफ्ट निर्माण, ग्रामसभा नीड में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के अंतर्गत एएनएम उपकेंद्र की स्थापना तथा चंपावत में इंटीग्रेटेड सैनिक कॉम्प्लेक्स निर्माण हेतु 15 नाली भूमि उपलब्ध कराए जाने की घोषणा शामिल है। सीएम ने कहा कि चंपावत के समग्र विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य, सड़क, पर्यटन और सांस्कृतिक विकास के क्षेत्रों में तेजी से कार्य किए जाएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि घोषित योजनाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाएगा।
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर खटीमा में कुमाऊं सांस्कृतिक सीएम ने उत्थान मंच की ओर से आयोजित प्रसिद्ध उत्तरायणी कौतिक मेले का सीएम पुष्कर सिंह धामी ने दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों को उत्तरायणी, मकर संक्रांति और लोहड़ी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय जीवन पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस पर्व का धार्मिक महत्व तो है ही, साथ ही इसका वैज्ञानिक पक्ष भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही प्रकृति में सकारात्मक परिवर्तन आता है, जो मानव जीवन को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान करता है। कहा कि उत्तरायणी का पर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह त्योहार हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है और लोक संस्कृति को सहेजने का कार्य करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।