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देहरादून से बड़ी खबर, पुल के पास संदिग्ध हालत में मिला शव, जांच में जुटी पुलिस..

देहरादून से बड़ी खबर, पुल के पास संदिग्ध हालत में मिला शव, जांच में जुटी पुलिस..

 

 

 

 

 

उत्तराखंड: राजधानी देहरादून से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक का शव बरामद होने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मामला नया गांव क्षेत्र का है, जहां आसन नदी झूला पुल के नीचे एक व्यक्ति का शव मिलने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। जानकारी के अनुसार यह घटना रविवार की बताई जा रही है। स्थानीय लोगों द्वारा शव देखे जाने के बाद पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई। शुरुआती जांच के बाद मृतक की पहचान महेंद्र सिंह (32) पुत्र सुरेंद्र सिंह, निवासी भूडपुर नया गांव के रूप में हुई है।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मृतक पिछले कई दिनों से लापता चल रहा था। परिजनों द्वारा 18 मार्च को उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी, जिसके बाद से उसकी तलाश की जा रही थी। इसी बीच अब उसका शव मिलने से परिवार में शोक की लहर दौड़ गई है। मौके से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर पुलिस मामले की गहन जांच में जुट गई है। तलाशी के दौरान मृतक की जेब से एक ब्लेड और सल्फास की गोली बरामद हुई है, जिससे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। प्रथम दृष्टया आशंका जताई जा रही है कि युवक की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से हुई हो सकती है, हालांकि वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

परिजनों से पूछताछ में सामने आया है कि महेंद्र सिंह डंपर चालक का काम करता था, लेकिन पिछले कुछ समय से उसके पास काम नहीं था। आर्थिक तंगी के चलते वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा था। परिवार के मुताबिक, वह नशे का आदी भी था और हाल के दिनों में शराब का सेवन काफी बढ़ गया था।घटना के बाद क्षेत्र में दहशत और चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। पुलिस ने परिजनों और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि घटना से जुड़े हर पहलू को सामने लाया जा सके। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्थिक और मानसिक दबाव में फंसे लोगों के लिए समय पर सहायता और परामर्श कितना जरूरी है।

 

 

 

 

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