सिरोबगड़ डेंजर जोन के ट्रीटमेंट को 95.12 करोड़ की स्वीकृति..
उत्तराखंड: बद्रीनाथ हाईवे पर चारधाम यात्रियों और चमोली-रुद्रप्रयाग के स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय से परेशानी का कारण बने सिरोबगड़ डेंजर जोन का अब स्थायी उपचार किया जाएगा। करीब चार दशक से भूस्खलन की समस्या झेल रहे इस क्षेत्र के लिए आखिरकार बड़ी राहत मिलने जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए 95.12 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद बद्रीनाथ धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को जहां सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी, वहीं स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही भी आसान हो सकेगी। सिरोबगड़ क्षेत्र लंबे समय से बद्रीनाथ हाईवे का सबसे संवेदनशील और खतरनाक हिस्सा माना जाता रहा है, जहां अक्सर भूस्खलन के कारण यातायात बाधित होता था। जिला प्रशासन रुद्रप्रयाग के लगातार प्रयासों और विभिन्न विभागों के साथ प्रभावी समन्वय का ही परिणाम है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-07 (पूर्व में एनएच-58) पर स्थित सिरोबगड़ क्षेत्र में भूस्खलन की समस्या के स्थायी समाधान का रास्ता साफ हो सका है।
प्रशासन की ओर से बार-बार इस समस्या को गंभीरता से उठाया गया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने इस पर ठोस निर्णय लिया। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सिरोबगड़ भूस्खलन ट्रीटमेंट कार्य को वार्षिक योजना 2025-26 के तहत स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस योजना के अंतर्गत आधुनिक तकनीकों के जरिए पहाड़ी ढलानों को स्थिर करने, जल निकासी की बेहतर व्यवस्था करने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के कार्य किए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद बद्रीनाथ हाईवे पर यातायात व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और निर्बाध होगी। साथ ही यह परियोजना चारधाम यात्रा के सुचारू संचालन में भी अहम भूमिका निभाएगी।
स्वीकृत परियोजना के तहत सिरोबगड़ क्षेत्र में चेनाज 350.767 से 350.938 के बीच भूस्खलन उपचार कार्य किया जाएगा। इस महत्वपूर्ण परियोजना की कुल स्वीकृत लागत करीब 95.12 करोड़ रुपये तय की गई है। इससे पहले राज्य लोक निर्माण विभाग की ओर से इस कार्य के लिए 96.11 करोड़ रुपये का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। तकनीकी परीक्षण और आवश्यक संशोधन के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने संशोधित लागत के साथ परियोजना को मंजूरी प्रदान कर दी है। सिरोबगड़ क्षेत्र बीते लगभग चार दशकों से भूस्खलन की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। बरसात के मौसम में यहां बार-बार पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम जाने वाला मार्ग बाधित हो जाता था। इससे चारधाम यात्रियों के साथ-साथ चमोली और रुद्रप्रयाग जिले के स्थानीय निवासियों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। जिला प्रशासन ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए लगातार स्थलीय निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण और संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया। इसके बाद प्रस्ताव को प्राथमिकता के साथ उच्च स्तर तक भेजा गया। प्रशासन के इन निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप अब इस लंबे समय से लंबित परियोजना को मंजूरी मिल सकी है।
स्वीकृत परियोजना के तहत पहाड़ी ढलानों को सुरक्षित करने के लिए ढीली चट्टानों की स्केलिंग, हाई टेन्साइल केबल नेट, डीटी मेश और रॉक एंकर जैसे तकनीकी उपाय अपनाए जाएंगे। इन कार्यों के माध्यम से ढलानों को मजबूती प्रदान की जाएगी, जिससे भविष्य में भूस्खलन की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। यह संपूर्ण कार्य ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) मॉडल के तहत कराया जाएगा, जिससे गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सकेगी। परियोजना के पूरा होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुरक्षित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा कि सिरोबगड़ ट्रीटमेंट कार्य को मिली स्वीकृति राष्ट्रीय राजमार्ग की सुरक्षा के लिहाज से एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी और चमोली तथा रुद्रप्रयाग जिले के स्थानीय निवासियों की आवाजाही भी सुगम हो सकेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन जनसुरक्षा और जनसुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार कार्य कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना की मंजूरी को न केवल चारधाम यात्रा मार्ग की सुरक्षा बल्कि क्षेत्रीय विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।