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उत्तराखंड

अगस्त्यमुनि में हुये बबाल ने बैसाखी मेले पर डाला बुरा असर

अगस्त्यमुनि में लगने वाले मेले में नहीं दिखी मेलार्थियों की भीड़
बबाल को देखकर पुलिस ने किये थे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
रुद्रप्रयाग। पिछले दिनों अगस्त्यमुनि में हुए बबाल की छाया ने बैशाखी मेले की रंगत ही फीकी कर दी। जहां पिछले सालों में दूर दराज के गांवों से मेलार्थियों की भीड़ मेले की रौनक बढ़ाते थे वहीं इस वर्ष वह भीड़ कहीं नजर नहीं आई। अगस्त्य मन्दिर में भी इस वर्ष भक्त जनों की कमी दिखी। वैसे पुलिस प्रशासन ने जहां शान्ति व्यवस्था बनाये रखने के लिए पूरी तैयारी की थी वहीं नगर पंचायत ने भी मेले को सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यवस्था चाक चैबन्द की हुई थी।

वैशाखी के शुभ अवसर पर अगस्त्यमुनि में पौराणिक मेला लगता है। मान्यता है कि वैशाखी पर्व पर जो व्यक्ति गंगा स्नान कर मंदाकिनी का जल अगस्त्य महर्षि व पास में स्थित भगवान शिव पर चढ़ाता है वह पुण्य प्राप्त कर धन्य हो जाता है। पूर्व में यहां के बुजुर्गों ने तत्कालीन ग्राम प्रधान से मिल कर इसे भव्य रूप देने का प्रयास किया था। उन्हीं लोगों के प्रयास से इस मेले को पर्यटन से मान्यता मिली थी और सरकार की ओर से मेले के आयोजन के लिये एक लाख की धनाराशि मिलती थी। वर्ष 2010 से मेले के आयोजन से सरकार ने हाथ खींच लिए और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से धीरे धीरे इस मेले को भव्य बनाने का सपना अधूरा रह गया। लेकिन जनता के उत्साह में कमी नहीं आई। मेला पौराणिक था। इसलिए इस मेले में न तो भक्त जनों की कमी ही कभी नजर आई और न ही मेलार्थियों की। जनता ने दिखाया कि प्रायोजित मेले से अच्छा स्वस्फूर्त मेला ज्यादा रौनक वाला होता है। जहां न कोई सरकारी ताम झाम होता है न कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम। फिर भी मेले में जनता का उत्साह प्रायोजित मेले से अधिक, लेकिन इस वर्ष मेले में पिछले हफ्ते हुए सांप्रदायिक बबाल की छाया पड़ती साफ देखी जा सकती है। पिछले वर्षों में जहां खेल मैदान मेलार्थियों से भरा रहता था। वहीं इस वर्ष यह खाली खाली नजर आ रहा है।

सड़कों में भी वह भीड़ का मन्जर कहीं नजर नहीं आया। जबकि पिछले वर्षों में पुलिस को सड़क पर यातायात व्यवस्था बनाये रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती थी। मन्दिर में भी इस वर्ष वह भीड़ नजर नहीं आई। हालांकि मठाधिपति पंडित अनसूया प्रसाद बेंजवाल ने दर्शनार्थियों के लिए पूरी व्यवस्था बनाई हुई थी। मन्दिर में पिछले वर्षों में हुई भीड़ को देखते हुए बड़ी संख्या में महिला एवं पुरूष पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। पूर्व में हुई घटना से सबक लेते हुए पुलिस प्रशासन ने मेले से पूर्व व्यापारियों एवं स्थानीय निवासियों की संयुक्त बैठक बुलाकर मेले की तैयारियों का जायजा लिया था। किसी अनहोनी से बचने के लिए पूरे मेला परिसर एवं बाजार में पुलिस का तगड़ा इन्तजाम किया गया था। वहीं नगर पंचायत ने मेला परिसर में हाई मास्क लाइट लगाने के साथ ही पेयजल एवं सफाई के लिए डस्टबिन इत्यादि की पूरी व्यवस्था की हुई थी। मेले में इस बार भीड़ कम होने का कारण बताते हुए नाकोट ग्राम के पूर्व मालगुजार चन्द्र सिंह नेगी ने कहा कि पिछले दिनों हुए बबाल के कारण दूर दराज के लोग मेले में नहीं दिख रहे हैं वहीं पिछले कई दिनों से हर रोज सांय को मौसम का मिजाज भी खराब हो रहा है। हर रोज हो रही आंधी तूफान एवं बारिस ओलों ने भी दूर दराज के मेलार्थियों को मेले में आने से रोका है।

नगर पंचायत के अध्यक्ष अशोक खत्री ने कहा कि पिछले दिनों हुए बबाल से मेले पर भी अपना असर डाला है। अफवाहों की वजह से दूर दराज की जनता मेले में नहीं दिखी। जबकि दूर दराज से आने वाले व्यापारी बिना किसी डर के तीन दिन पूर्व ही अपनी दुकानें लगा चुके थे। नगर पंचायत ने मेला परिसर में व्यापारियों एवं मेलार्थियों के लिए सभी प्रकार की सुविधायें उपलब्ध करा दी थी। वहीं थानाध्यक्ष सुबोध ममगांईं के नेतृत्व में पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम किए हुए थे। प्रशासन लाख शान्ति एवं सदभाव के दावे करे, लेकिन देखा जाय तो अफवाहें अभी भी जारी हैं जिन्होंने इस वर्ष बैशाखी मेले की रंगत ही फीकी कर दी है। रही सही कसर मौसम ने भी पूरी की। हर रोज सांय को हो रही बारिस एवं ओलों एवं तूफान ने भी लोगों के कदमों को मेले में आने से रोका है।

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