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उत्तराखंड

दीपावली पर महिला उद्यमिता को नई उड़ान..

दीपावली पर महिला उद्यमिता को नई उड़ान..

दीये और कैंडल बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं..

 

 

उत्तराखंड: दीपावली के त्योहार ने रुद्रप्रयाग की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोले हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं पारंपरिक मिट्टी के दीये और आकर्षक कैंडल तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत करने में जुटी हैं। उनके इस प्रयास से जहां परिवार की आय बढ़ाने का रास्ता खुल रहा है, वहीं स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तकला को भी बढ़ावा मिल रहा है। जनपद के ग्राम दानकोट की बीना देवी सहित साईं बाबा स्वयं सहायता समूह और स्यूर के जय अगस्त्यऋषि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं दीपावली के लिए दीये और कैंडल तैयार कर रही हैं। त्योहार को देखते हुए इन उत्पादों की मांग को अवसर में बदलने के लिए महिलाएं अपने हुनर और मेहनत का इस्तेमाल कर रही हैं।

स्थानीय उत्पादों से रोजगार की राह
स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं घर और गांव के आसपास ही रोजगार के अवसर तलाश रही हैं। मिट्टी के दीये बनाने के साथ कैंडल तैयार करने का काम उन्हें अपनी रचनात्मकता को आय का साधन बनाने का मौका दे रहा है। इससे महिलाएं परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने के साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियां महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार होने से पारंपरिक कौशल को बनाए रखने और छोटे स्तर पर कारोबार विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

पारंपरिक कला को भी मिल रहा बढ़ावा
दीपावली पर मिट्टी के दीयों का विशेष महत्व है। भारतीय परंपरा से जुड़े इन दीयों के निर्माण और इस्तेमाल से स्थानीय कारीगरी को प्रोत्साहन मिलता है। वहीं, सजावटी कैंडल तैयार कर महिलाएं त्योहार की जरूरतों के अनुरूप नए उत्पाद भी बाजार में ला रही हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने की संभावना रखती है। दीपावली के लिए तैयार किए जा रहे दीये और कैंडल महिलाओं की मेहनत और हुनर का उदाहरण हैं। यह पहल केवल त्योहार के दौरान अतिरिक्त कमाई का जरिया नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी है।

 

 

 

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