उत्तराखंड

कसार देवी में संस्कृति और साहसिक पर्यटन का उत्सव, ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल’ में उमड़ी भीड़..

कसार देवी में संस्कृति और साहसिक पर्यटन का उत्सव, ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल’ में उमड़ी भीड़..

 

उत्तराखंड: विश्व प्रसिद्ध कसार देवी क्षेत्र के डीनापानी में आयोजित ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल’ इन दिनों सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और साहसिक पर्यटन का शानदार केंद्र बना हुआ है। प्राकृतिक सुंदरता से घिरे इस आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और एडवेंचर स्पोर्ट्स का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। महोत्सव का आनंद लेने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश-विदेश से भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। फेस्टिवल के दौरान डीनापानी मैदान में दिनभर सांस्कृतिक गतिविधियों और शाम को रंगारंग प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी है। कुमाऊं की लोक संस्कृति से सजे कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक कलाकारों ने झोड़ा, चांचरी, जागर और पारंपरिक लोकगीतों की शानदार प्रस्तुतियां देकर उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों पर स्थानीय लोग और पर्यटक भी लोकधुनों पर थिरकते नजर आए। बच्चों और युवा कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन कर खूब सराहना बटोरी।

वहीं फेस्टिवल का सबसे बड़ा आकर्षण निकटवर्ती गड़ोली क्षेत्र में आयोजित पैराग्लाइडिंग गतिविधि रही। आसमान में उड़ते रंग-बिरंगे पैराग्लाइडरों का नजारा देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। प्रशिक्षित पायलटों और प्रतिभागियों ने सुरक्षित उड़ानों के जरिए अपने कौशल का प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने तालियों की गूंज के साथ सराहा। युवाओं और पर्यटकों में एडवेंचर स्पोर्ट्स को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला और कई लोगों ने भविष्य में इस गतिविधि का हिस्सा बनने की इच्छा भी जताई। आयोजकों का कहना है कि फेस्टिवल का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ना, स्थानीय कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना और पर्वतीय क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देना भी है। इस तरह के आयोजन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ होटल, होमस्टे, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को भी नया बाजार उपलब्ध कराते हैं।

पर्यटकों ने भी फेस्टिवल की सराहना करते हुए कहा कि एक ही स्थान पर उत्तराखंड की संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और एडवेंचर गतिविधियों का अनुभव यादगार है। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, महोत्सव के चलते क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या बढ़ी है, जिससे कारोबार में भी सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। आयोजकों का मानना है कि भविष्य में इस प्रकार के आयोजनों का दायरा और बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत, लोक कला और प्राकृतिक पर्यटन को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान मिल सके। ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है, जो संस्कृति और पर्यटन दोनों को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।

 

 

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