उत्तराखंड

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का आंकड़ा 400 के पार..

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का आंकड़ा 400 के पार..

पुरुषों में संक्रमण की दर ज्यादा..

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में मौसम में लगातार बदलाव के बीच मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। इसी बीच सीजनल इन्फ्लुएंजा (H1N1) के मामलों में भी तेजी दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में स्वाइन फ्लू के 25 नए मरीज सामने आए हैं। इनमें 11 मामले देहरादून और 14 अन्य जिलों से हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 408 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 324 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 82 मरीजों का इलाज चल रहा है। संक्रमण से अब तक दो मरीजों की मौत भी दर्ज की गई है।

पुरुषों में संक्रमण का आंकड़ा ज्यादा

स्वाइन फ्लू के मामलों में पुरुष मरीजों की संख्या महिलाओं से अधिक है। कुल 408 संक्रमितों में 224 पुरुष और 184 महिलाएं शामिल हैं। उम्र के लिहाज से देखें तो बच्चों के साथ बुजुर्गों में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। 1 से 10 वर्ष की उम्र के 66 बच्चों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। वहीं 11 से 20 वर्ष के 31, 21 से 30 वर्ष के 41 और 31 से 40 वर्ष के 34 मरीज संक्रमित पाए गए हैं। इसके साथ ही 41 से 50 वर्ष की उम्र के 44, 51 से 60 वर्ष के 67, 61 से 70 वर्ष के 70, 71 से 80 वर्ष के 42 और 81 से 90 वर्ष की उम्र के 13 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

स्वास्थ्य विभाग संक्रमण की स्थिति पर नजर रखने के साथ संदिग्ध मरीजों की जांच पर भी जोर दे रहा है। अब तक स्वाइन फ्लू की जांच के लिए 1017 सैंपल लिए गए हैं। इनमें देहरादून के 269 और अन्य जिलों के 139 सैंपल पॉजिटिव मिले हैं। वहीं कोरोना संक्रमण की जांच के लिए अब तक 531 सैंपल लिए गए हैं, जिनमें 46 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें 20 मामले देहरादून और 26 अन्य जिलों के हैं। स्वाइन फ्लू के साथ डेंगू के मामलों पर भी स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है। प्रदेश में डेंगू की जांच के लिए अब तक करीब 27,839 सैंपल लिए गए हैं। इनमें 150 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। डेंगू के कुल मरीजों में 75 देहरादून और 75 अन्य जिलों से हैं। इनमें से 128 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 22 मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है।

क्या हैं स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण?

H1N1 संक्रमण होने पर तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। नाक बहना या बंद होना और सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। कुछ बच्चों में उल्टी और दस्त की समस्या भी देखी जा सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक लक्षण नजर आने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से संक्रमण से बचाव के लिए सामान्य सावधानियां बरतने की अपील की है। हाथों को नियमित रूप से साबुन-पानी से धोना, जरूरत के अनुसार सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनना मददगार हो सकता है। खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक को ढकने, चेहरे को बार-बार छूने से बचने और लक्षण होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों का सेवन करने के साथ दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करने को कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को दिए निगरानी के निर्देश

बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा प्रभारियों को लगातार स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में पहुंचने वाले संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच और उपचार के साथ उनकी स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है। देहरादून के सीएमओ मनोज शर्मा के अनुसार स्वास्थ्य अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं। मामलों में अचानक बढ़ोतरी सामने आने पर तत्काल जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।

 

 

 

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