उत्तराखंड

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का बढ़ता प्रकोप, 22 दिन में 31 मरीज..

उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का बढ़ता प्रकोप, 22 दिन में 31 मरीज..

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू यानी इंफ्लुएंजा एच1एन1 ने दस्तक दे दी है। अगस्त में अब तक प्रदेश में 31 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें ज्यादातर मामले देहरादून से सामने आए हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों में निगरानी बढ़ाने के साथ अस्पतालों को जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्वाइन फ्लू को लेकर एडवाइजरी जारी कर सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ मेडिकल कॉलेजों को सतर्क रहने को कहा है। वहीं, मरीजों में शुरुआती लक्षण सामने आने पर स्क्रीनिंग और आवश्यक जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। संक्रमण से निपटने के लिए विभाग की ओर से उपचार संबंधी एसओपी भी तैयार की जा रही है।

राज्य सर्विलांस अधिकारी डॉ. पंकज का कहना हैं कि सभी जिलों के सीएमओ को अस्पतालों में तैयारियों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। एकीकृत रोग निगरानी परियोजना (आईडीएसपी) के तहत प्रदेश में स्वाइन फ्लू के मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है। हर जिले में रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। किसी इलाके में चार से अधिक मामले सामने आने पर टीम मौके पर पहुंचेगी और वहां स्क्रीनिंग के साथ संक्रमण की स्थिति का आकलन करेगी। टीम में फिजिशियन, विशेषज्ञ समेत चार स्वास्थ्यकर्मी शामिल रहेंगे।

अस्पतालों में दवा और उपकरण रखने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा संस्थानों को इंफ्लुएंजा जांच किट, पीपीई किट, मास्क, वीटीएम वायल और ओसेल्टामिविर दवा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा है। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए वेंटिलेटर समेत अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने अस्पतालों को अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा करने को कहा है। अधिकारियों के मुताबिक संक्रमण के मामलों पर जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक लगातार नजर रखी जा रही है।

सामान्य वायरल जैसे दिखते हैं शुरुआती लक्षण
एम्स ऋषिकेश के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार के मुताबिक स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल संक्रमण जैसे ही दिखाई देते हैं। अचानक तेज बुखार, ठंड लगना, खांसी, नाक बहना, सांस लेने में परेशानी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और अत्यधिक थकान इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।चिकित्सकों का कहना है कि खासकर सांस लेने में परेशानी, तेज बुखार या लक्षण लगातार बढ़ने की स्थिति में लापरवाही नहीं करनी चाहिए। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सलाह लेकर आवश्यक जांच और उपचार कराना जरूरी है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. विजय भंडारी ने बताया कि वायरस में होने वाले आनुवंशिक बदलाव यानी म्यूटेशन के कारण समय के साथ उसका स्वरूप बदल सकता है। उन्होंने कहा कि एच1एन1 संक्रमण से निपटने के लिए प्रदेश की चिकित्सा इकाइयों में जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने पर जोर दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फिलहाल प्राथमिकता संक्रमण की निगरानी, समय पर पहचान और अस्पतालों में उपचार की पर्याप्त व्यवस्था बनाए रखने की है।

 

 

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