चारधाम पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर संचालन के लिए बनेगी सख्त एसओपी..
पशु क्रूरता पर प्रशासन की कड़ी नजर..
उत्तराखंड: चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। इस वर्ष विशेष रूप से यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर संचालन को लेकर सख्त मानक लागू किए जाएंगे। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि पशु सुरक्षा, स्वास्थ्य और पशु क्रूरता रोकने के लिए एक विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की जाएगी, जिसे यात्रा शुरू होने से पहले लागू कर दिया जाएगा। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जिला पंचायत और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। दोनों विभाग जल्द ही यमुनोत्री पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के बाद घोड़ा-खच्चरों के संचालन, उनके स्वास्थ्य परीक्षण, विश्राम, भोजन और सुरक्षा से जुड़े स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। प्रशासन का फोकस इस बार विशेष रूप से पशु क्रूरता की घटनाओं को रोकने पर रहेगा। साफ किया गया है कि जानवरों से क्षमता से अधिक कार्य लेने या तय मानकों का उल्लंघन करने पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
शाम 6 बजे के बाद नहीं चलेेंगे घोड़े-खच्चर..
नई व्यवस्था के तहत यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर शाम छह बजे के बाद घोड़ा-खच्चरों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा। यह कदम यात्रियों और पशुओं दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है, क्योंकि अंधेरा होने के बाद दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर हर वर्ष लगभग 3500 से 4000 घोड़े-खच्चर यात्रियों को जानकीचट्टी से धाम तक पहुंचाने और वापस लाने में लगाए जाते हैं। पिछले वर्ष करीब 3600 पशुओं का पंजीकरण हुआ था। यात्रा सीजन में अधिक कमाई के लालच में कई संचालक जानवरों से अतिरिक्त फेरे लगवाते हैं, जिससे उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ता है और कई बार मौत तक हो जाती है। प्रशासन इस बार ऐसी लापरवाही पर सख्ती बरतने के मूड में है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार एक समय में अधिकतम 600 घोड़ा-खच्चरों को ही ट्रैक पर जाने की अनुमति होगी। इनमें से 100 के जानकीचट्टी लौटने के बाद ही अन्य पशुओं को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। इससे मार्ग पर भीड़ नियंत्रण और पशुओं पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।
मार्ग में घोड़े-खच्चरों के लिए गर्म पानी और चारे की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही यदि किसी पशु की मृत्यु होती है तो उसके लिए निर्धारित स्थान पर वैज्ञानिक तरीके से दफनाने की व्यवस्था भी की जाएगी। मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी एच.एस. बिष्ट ने पुष्टि की है कि जिलाधिकारी के निर्देशानुसार एसओपी का प्रारूप तैयार किया जा रहा है और इसे जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा। चारधाम यात्रा में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में यमुनोत्री धाम के दुर्गम पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर सेवाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रशासन का कहना है कि इस बार यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और पशु हितों के प्रति संवेदनशील बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं की सुविधा और पशुओं की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।