उत्तराखंड

उत्तराखंड में भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिल सकती है बड़ी राहत..

उत्तराखंड में भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिल सकती है बड़ी राहत..

 

 

 

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड में महिलाओं से जुड़े फ्रंटलाइन कर्मचारियों को राहत देने की दिशा में सरकार एक अहम फैसला लेने की तैयारी में है। प्रदेश में कार्यरत भोजन माताओं, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर शासन स्तर पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस संबंध में अपने-अपने प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित मध्य क्षेत्र परिषद की बैठक के दौरान भी उत्तराखंड सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि का मुद्दा मजबूती से उठाया था। इससे संकेत मिलते हैं कि राज्य सरकार इस विषय पर केंद्र सरकार के साथ भी समन्वय कर रही है, ताकि मानदेय बढ़ाने का रास्ता साफ हो सके। उत्तराखंड में वर्तमान समय में 40 हजार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं सेवाएं दे रही हैं। ये कार्यकर्ता लंबे समय से अपने मानदेय में वृद्धि की मांग करती आ रही हैं।

जमीनी स्तर पर पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में इनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है, लेकिन इसके बावजूद इन्हें मिलने वाला मानदेय अपेक्षाकृत कम है। मौजूदा व्यवस्था के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से 4,500 रुपये प्रति माह, जबकि राज्य सरकार की ओर से 4,800 रुपये प्रति माह मानदेय दिया जा रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच यह राशि अपर्याप्त मानी जा रही है, जिसको लेकर लगातार विरोध और ज्ञापन भी दिए जाते रहे हैं। राज्य सरकार अब इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मानदेय बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय प्रस्तावों की समीक्षा के बाद इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इसका सीधा लाभ प्रदेश की हजारों महिला कर्मियों को मिलेगा और उनके आर्थिक हालात में सुधार आएगा।

सरकार के इस संभावित कदम को महिला सशक्तीकरण और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। लंबे समय से प्रतीक्षित इस फैसले से भोजन माताओं, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में नई उम्मीद जगी है, जो राज्य की बुनियादी सेवाओं की रीढ़ मानी जाती हैं। इस विषय पर निर्णय लेने के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रमुख सचिव आरके सुधांशु की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों और आंकड़ों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा ने कहा कि विभाग की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। इस रिपोर्ट में वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दिए जा रहे मानदेय का पूरा विवरण शामिल किया गया है, ताकि समिति को निर्णय लेने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

प्रदेश में 24000 भोजन माताएं कार्यरत..

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में करीब 24 हजार भोजन माताएं कार्यरत हैं, जो प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। फिलहाल भोजन माताओं को प्रतिमाह तीन हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है। इस राशि में केंद्र सरकार की ओर से 900 रुपये, राज्यांश के रूप में 100 रुपये, जबकि राज्य सरकार द्वारा अलग से दो हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा मानदेय को बढ़ाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और इस पर निर्णय का इंतजार है। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है।

प्रदेश में लगभग 12 हजार आशा कार्यकर्ता कार्यरत हैं, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे कार्यों में अहम भूमिका निभाती हैं। अधिकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी और भोजन माताओं के साथ-साथ आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय को भी एक साथ संशोधित करने की दिशा में सरकार विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि ये तीनों वर्ग प्रदेश की सामाजिक और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की मजबूत कड़ी हैं। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग को देखते हुए अब इस दिशा में ठोस कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो इससे प्रदेश की हजारों महिला कार्यकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा और उनके कार्य के प्रति सम्मान भी बढ़ेगा।

 

 

 

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