उत्तराखंड

चारधाम यात्रा शुरू होते ही गंगोत्री धाम में लौटेगी सदियों पुरानी परंपरा..

चारधाम यात्रा शुरू होते ही गंगोत्री धाम में लौटेगी सदियों पुरानी परंपरा..

 

 

 

उत्तराखंड: आगामी चारधाम यात्रा के साथ ही गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं को एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव मिलने जा रहा है। गंगोत्री धाम मंदिर समिति ने बड़ा निर्णय लेते हुए सुबह और शाम होने वाली गंगा आरती में पारंपरिक पौराणिक आरती को पुनः शामिल करने का फैसला किया है। यह वही आरती होगी, जिसे वर्षों पहले धाम के बुजुर्ग तीर्थ पुरोहितों द्वारा गाया जाता था और जो गंगोत्री की विशिष्ट धार्मिक पहचान मानी जाती है। समिति का कहना है कि बीते कई दशकों से गंगोत्री धाम में भी देश के अन्य तीर्थ स्थलों, विशेषकर हरिद्वार में प्रचलित गंगा आरती का ही गायन किया जा रहा था। इससे धाम की अपनी मौलिक परंपरा धीरे-धीरे पीछे छूटती चली गई। अब चारधाम यात्रा के अवसर पर गंगोत्री की पौराणिक गंगा आरती को फिर से जीवंत करने का निर्णय लिया गया है।

गंगोत्री धाम मंदिर समिति पहले ही धाम की धार्मिक मर्यादाओं को लेकर सख्त निर्णय ले चुकी है। हाल ही में समिति ने सिख और बौद्ध धर्मावलंबियों को छोड़कर अन्य गैर-हिंदुओं के मंदिर परिसर में प्रवेश को वर्जित करने का फैसला लिया था। इसी क्रम में अब आरती की परंपरा को भी उसके मूल स्वरूप में वापस लाने का निर्णय लिया गया है, ताकि धाम की पौराणिक और आध्यात्मिक गरिमा बनी रहे। गंगोत्री धाम मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि कई वर्षों से गंगोत्री में हरिद्वार और अन्य धार्मिक स्थलों की तरह गंगा आरती का गायन किया जा रहा था, जबकि गंगोत्री की अपनी विशिष्ट पौराणिक आरती रही है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष चारधाम यात्रा से उसी प्राचीन आरती परंपरा को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को गंगा जी की आराधना का वास्तविक और पारंपरिक स्वरूप देखने को मिलेगा।

उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने गंगोत्री धाम मंदिर समिति के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम गंगोत्री धाम की पौराणिक परंपराओं के संरक्षण और निर्वहन की दिशा में अत्यंत सराहनीय है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा जी की प्राचीन आरती और उसकी आध्यात्मिक महत्ता को समझने का अवसर मिलेगा। समिति का मानना है कि पौराणिक गंगा आरती की वापसी से गंगोत्री धाम की धार्मिक पहचान और अधिक मजबूत होगी। चारधाम यात्रा के दौरान आने वाले श्रद्धालु अब केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि गंगा जी की उस आरती के साक्षी बन सकेंगे, जो सदियों से इस धाम की आत्मा रही है। कुल मिलाकर, गंगोत्री धाम में पौराणिक गंगा आरती को पुनर्जीवित करने का यह निर्णय परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पसंद की जा रही पौराणिक आरती

हाल ही में लोकगायिका श्रद्धा पांडे कुहुप्रिया की ओर से इस पौराणिक आरती को स्वर दिया गया है। इस पर लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसके बाद निर्णय लिया गया कि अब पौराणिक गंगा आरती…ऊं जय गंगे माई…श्री जय गंगे माई। सगर लाल तारण को, इस जग में आई। विष्णु चरण से निकली, ज्योति जगत छाई। शिव ने शीश चढ़ाई, सुर नर मुनी सुख दाई का गंगोत्री में सुबह-शाम की आरती में गायन किया जाएगा।

 

 

 

 

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