उत्तराखंड के गांवों में महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, जूट और फ्रूट प्रोसेसिंग से बढ़ी आय..
उत्तराखंड: उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि स्वरोजगार के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं। स्वयं का उद्यम स्थापित कर न सिर्फ वे अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं। रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ और अगस्त्यमुनि विकासखंडों में चल रही पहलें इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई हैं। ऊखीमठ विकासखंड के सारी गांव में देवरियाताल ग्राम संगठन के अंतर्गत जीवन ज्योति सीएलएफ द्वारा संचालित जूट यूनिट ग्रामीण महिलाओं के लिए सशक्तिकरण का केंद्र बन गई है। इस यूनिट में आधुनिक मशीनों की मदद से स्थानीय महिलाएं जूट से विभिन्न प्रकार के गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। यहां स्कूल बैग, कैरी बैग, महिलाओं के आकर्षक जूट पर्स सहित कई उपयोगी उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिनकी स्थानीय और बाहरी बाजारों में अच्छी मांग है। वर्तमान में इस यूनिट से गांव की 10 महिलाएं प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई हैं, जिन्हें नियमित रोजगार के साथ सम्मानजनक आय भी प्राप्त हो रही है।
यूनिट से जुड़ी महिला सदस्य प्रीमा देवी और पूजा नेगी बताती हैं कि जूट यूनिट की स्थापना से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां उनका दायरा घर तक सीमित था, वहीं अब वे हुनरमंद बनकर आत्मनिर्भर हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्य से न केवल उन्हें रोजगार मिला है, बल्कि पारिवारिक आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे परिवार की आर्थिक मजबूती में सक्रिय भूमिका निभा पा रही हैं। यह जूट यूनिट राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और ग्रामोत्थान मिशन के सहयोग से स्थापित की गई है। भविष्य में यूनिट का विस्तार कर अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, ताकि गांव की अन्य महिलाएं भी इसका लाभ उठा सकें।
फ्रूट प्रोसेसिंग से खुल रहे स्वरोजगार के नए रास्ते
इसी क्रम में अगस्त्यमुनि विकासखंड के महड़ गांव में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ग्रामोत्थान परियोजना के तहत एक और सराहनीय पहल की जा रही है। यहां शिव शक्ति स्वायत्त सहकारिता महड़ से जुड़ी महिलाओं को फ्रूट प्रोसेसिंग का दो दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ग्रामोत्थान परियोजना के वित्तीय सहयोग से शिव शक्ति स्वायत्त सहकारिता में एक फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की गई है, जिसे सामुदायिक उद्यम के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस यूनिट के माध्यम से उद्योग विभाग रुद्रप्रयाग द्वारा महिलाओं को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध फलों के प्रसंस्करण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को अमरूद की जैली, सेब का जैम, मिक्स अचार, विभिन्न प्रकार की चटनियां सहित अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाने की विधियां सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्थानीय फलों का अधिकतम और बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना, सुरक्षित और पोषणयुक्त खाद्य उत्पाद तैयार करना तथा महिलाओं को लघु उद्यमों के माध्यम से आय अर्जन के अवसर प्रदान करना है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए जूट यूनिट और फ्रूट प्रोसेसिंग जैसे प्रशिक्षण अत्यंत प्रभावी साबित हो रहे हैं। इससे न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार के नए आयाम भी विकसित हो रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं की यह पहल यह साबित कर रही है कि यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो पहाड़ की महिलाएं भी आत्मनिर्भर बनकर पूरे क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकती हैं।