उपनल के बाद वन विभाग के दैनिक श्रमिकों पर धामी सरकार मेहरबान, जल्द मिलेगा बड़ा लाभ..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में सीएम धामी के नेतृत्व वाली सरकार लगातार कर्मचारियों और श्रमिकों के हित में अहम निर्णय ले रही है। उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने की घोषणा के बाद अब सरकार ने वन विभाग में कार्यरत सैकड़ों दैनिक श्रमिकों को लेकर भी बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। सरकार वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप न्यूनतम वेतन देने पर गंभीरता से विचार कर रही है और इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडलीय उप समिति की स्वीकृति भी मिल चुकी है। वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत दैनिक श्रमिक लंबे समय से कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। जंगलों में गश्त करना, वन्यजीवों से जुड़े जोखिमपूर्ण हालातों का सामना करना, वनाग्नि पर नियंत्रण, अवैध कटान और तस्करी रोकने जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में इन श्रमिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इसके बावजूद अब तक उन्हें अपेक्षाकृत कम मानदेय पर काम करना पड़ रहा था। इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने इनके वेतनमान में सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस उद्देश्य से वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया गया था। समिति ने वन विभाग के दैनिक श्रमिकों की कार्यप्रणाली, जोखिम, जिम्मेदारियों और वर्तमान वेतन स्थिति का अध्ययन किया और सातवें वेतन आयोग के अनुसार न्यूनतम वेतन दिए जाने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति प्रदान की है। वन विभाग के दैनिक श्रमिक न केवल पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं, बल्कि राज्य की वन संपदा और जैव विविधता की रक्षा में भी अग्रिम पंक्ति में कार्य करते हैं। ऐसे में उनके आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना आवश्यक है।
उत्तराखंड सरकार वन विभाग में कार्यरत दैनिक श्रमिकों के हित में एक और बड़ा निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ गई है। वन मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति ने अपनी बैठक में यह सिफारिश की है कि वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को सातवें वेतन आयोग के अनुरूप न्यूनतम वेतन दिया जाए। समिति ने सर्वसम्मति से न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिए जाने पर सहमति जताई है। उप समिति की यह सिफारिश अब राज्य सरकार के समक्ष रखी जाएगी। सीएम धामी की स्वीकृति मिलने के बाद इस प्रस्ताव को कैबिनेट की बैठक में लाया जाएगा। राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही वन विभाग में कार्यरत करीब 700 दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। वन विभाग के दैनिक श्रमिक लंबे समय से कठिन और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं।
जंगलों में गश्त, वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं पर नजर, वनाग्नि नियंत्रण, अवैध कटान और तस्करी रोकने जैसे कार्यों में इन श्रमिकों की भूमिका बेहद अहम है। इसके बावजूद अब तक उन्हें सीमित मानदेय पर काम करना पड़ रहा था। सरकार का मानना है कि इन श्रमिकों के कार्य की प्रकृति और जोखिम को देखते हुए उनके वेतनमान में सुधार जरूरी है। बता दे कि इससे पहले भी उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत वर्ष 2020 में करीब 300 दैनिक श्रमिकों को महंगाई भत्ता देने का आदेश जारी किया था। हालांकि उस समय सभी श्रमिकों को इसका लाभ नहीं मिल पाया था। शेष बचे दैनिक श्रमिकों को भी समान रूप से लाभ देने और वेतन से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने के उद्देश्य से ही मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया गया था।
साल 2026 की शुरुआत में ही धामी सरकार ने हजारों उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन की सौगात देकर बड़ी राहत दी थी। अब वन विभाग के सैकड़ों दैनिक श्रमिकों के लिए भी न्यूनतम वेतन का रास्ता साफ किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इस फैसले से न केवल श्रमिकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनके मनोबल में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। सरकार के इस कदम को श्रमिक कल्याण की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है, जिससे वन विभाग की कार्यक्षमता और जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की संतुष्टि दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।
राज्य के कर्मचारियों और श्रमिकों के हित उसकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। इसी क्रम में वन विभाग के दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन देने से जुड़े प्रस्ताव को न केवल प्रशासनिक, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह निर्णय औपचारिक रूप से लागू हो सकता है, जिससे वन विभाग में कार्यरत सैकड़ों दैनिक श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। सरकार की ओर से न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन देने की तैयारी को श्रमिक वर्ग एक बड़ी राहत के रूप में देख रहा है। हालांकि दैनिक श्रमिकों का कहना है कि यदि सरकार न्यूनतम वेतन के साथ महंगाई भत्ता भी प्रदान करती है, तो इसका वास्तविक लाभ और अधिक बढ़ जाएगा। इसके साथ ही श्रमिकों ने पूर्व अवधि का एरियर दिए जाने की मांग भी उठाई है, ताकि वर्षों से चली आ रही वेतन असमानता का उचित समाधान हो सके।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पृथ्वी सिंह राणा ने कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन के साथ अन्य वैधानिक लाभ भी देने चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और उनके योगदान को देखते हुए यह आवश्यक है कि उन्हें केवल वेतन ही नहीं, बल्कि महंगाई भत्ता और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाएं। कर्मचारी संघ ने सरकार से इस दिशा में ठोस और अंतिम निर्णय लेने की मांग की है। अब सभी की नजरें कैबिनेट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिसके बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार दैनिक श्रमिकों को न्यूनतम वेतन के साथ अतिरिक्त लाभ देने को लेकर क्या रुख अपनाती है।