उत्तराखंड

हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात यात्रा स्थगित..

हिमालयी महाकुंभ नंदा देवी राजजात यात्रा स्थगित..

वसंत पंचमी पर होगा अगले आयोजन का ऐलान..

 

 

उत्तराखंड: उत्तराखंड की आस्था, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक मानी जाने वाली हिमालयी महाकुंभ श्रीनंदा देवी राजजात को वर्ष 2026 में प्रस्तावित अगस्त–सितंबर के आयोजन से स्थगित कर दिया गया है। श्रीनंदा देवी राजजात समिति ने यह महत्वपूर्ण निर्णय मौसम, मलमास, बुग्यालों की स्थिति, अधोसंरचना की कमी और प्रशासन की ओर से भेजे गए पुनर्विचार पत्र को ध्यान में रखते हुए लिया है। अब राजजात का अगला आयोजन किस वर्ष होगा, इसकी आधिकारिक घोषणा वसंत पंचमी के अवसर पर की जाएगी। रविवार को कर्णप्रयाग में आयोजित श्रीनंदा देवी राजजात समिति की कोर कमेटी की बैठक में इस पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक की अध्यक्षता समिति अध्यक्ष एवं कांसुवा के राजकुंवर डॉ. राकेश कुंवर ने की। बैठक में बीते वर्ष अक्टूबर में संपन्न अध्ययन यात्रा की रिपोर्ट और चमोली जिला प्रशासन के पुनर्विचार पत्र को आधार बनाया गया। समिति ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वर्तमान परिस्थितियों में वर्ष 2026 में राजजात का आयोजन जनसुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है।

समिति के अनुसार वर्ष 2026 में मलमास के कारण होमकुंड में पूजा की तिथि 20 सितंबर पड़ रही है। इस अवधि में बुग्यालों में मौसम प्रतिकूल रहता है और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की स्थिति बन जाती है, जिससे यात्रा अत्यंत जोखिमपूर्ण हो सकती है। इसके साथ ही राजजात के विभिन्न पड़ावों पर आवश्यक ढांचागत सुविधाओं का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया।

समिति ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 की राजजात को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी। वसंत पंचमी के दिन परंपरा अनुसार श्रीनंदा देवी की मनौती की जाएगी। मनौती तक के सभी धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रम पूर्ववत चलते रहेंगे, लेकिन राजजात का विस्तृत कार्यक्रम और दिनपट्टा जारी नहीं किया जाएगा। वसंत पंचमी के अवसर पर राजकुंवरों द्वारा ज्योतिषीय गणना के बाद यह घोषित किया जाएगा कि राजजात का अगला आयोजन किस वर्ष संपन्न होगा। समिति ने संकेत दिए हैं कि राजजात को वर्ष 2027 में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसकी औपचारिक घोषणा वसंत पंचमी को की जाएगी।

बैठक में राजजात के भविष्य के आयोजन को लेकर कई अहम प्रस्ताव भी पारित किए गए। इनमें प्रशासनिक ढांचे और प्राधिकरण के गठन, तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी और जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियों के गठन, मंदिर समितियों, हक-हकूकधारियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने, स्थायी वित्तीय प्रावधान और बजट में श्रीनंदा देवी राजजात मद के सृजन जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इसके साथ ही जिला योजना में राजजात के लिए अलग मद बनाने, संयुक्त मानचित्र तैयार करने, बधाण क्षेत्र की मां नंदादेवी से जुड़े सभी पड़ावों को आधिकारिक पड़ाव घोषित करने तथा देवराड़ा और कुरुड़ को पर्यटन विभाग के मानचित्र में दर्ज कराने के प्रस्ताव भी पारित किए गए।

समिति ने यह भी निर्णय लिया कि भविष्य में राजजात में शामिल होने वाली सभी डोलियों और श्रद्धालुओं के लिए सहायक मार्गों और पड़ावों पर पर्याप्त ढांचागत सुविधाएं विकसित की जाएंगी, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हो सके। बता दे कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी के अवसर पर मनौती महोत्सव में राजजात 2026 का कार्यक्रम जारी किए जाने की संभावना थी, लेकिन उससे पहले ही प्रशासन ने समिति को यात्रा पर पुनर्विचार का पत्र भेजा था। पत्र में बीते वर्षों में हुई भारी बारिश, बादल फटने की घटनाओं और देवाल, थराली व नंदानगर क्षेत्रों में चल रहे पुनर्निर्माण कार्यों का उल्लेख करते हुए यात्रा के दौरान संभावित जोखिमों की ओर ध्यान दिलाया गया था। प्रशासन ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता और निर्जन क्षेत्रों में आपदा की आशंका को देखते हुए जनसुरक्षा के दृष्टिगत अपेक्षित निर्णय लेने का आग्रह किया था। समिति ने प्रशासन के इस पत्र और मलमास से जुड़ी बाधाओं को आधार बनाते हुए स्पष्ट किया कि राजजात को स्थगित करने का निर्णय पूरी तरह जनसुरक्षा और श्रद्धालुओं के हित में लिया गया है। अब श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों की निगाहें वसंत पंचमी पर टिकी हैं, जब इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महाकुंभ के अगले आयोजन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।

 

 

 

 

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