1320 मेगावाट बिजली से बदलेगी उत्तराखंड की तस्वीर, ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा कदम..
उत्तराखंड: उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य को 1320 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। यूपीसीएल की प्रस्तावित कोल आधारित बिजली परियोजना के लिए अदानी पावर को न्यूनतम बोलीदाता के रूप में चुना गया है। परियोजना के तहत कंपनी अपने खर्च पर जमीन की व्यवस्था करने के साथ प्लांट स्थापित करेगी और कोयले की खरीद भी स्वयं करेगी। इस परियोजना के लिए राज्य को पहले ही केंद्र सरकार की ओर से कोल ब्लॉक आवंटित किया जा चुका है। कोयला छत्तीसगढ़ में उपलब्ध होगा, जबकि अदानी पावर वहीं परियोजना स्थापित करने की योजना पर काम करेगा। समझौते के तहत उत्तराखंड को 25 वर्षों तक 5.746 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली की आपूर्ति की जाएगी।
2030-31 तक बिजली की कमी का अनुमान
यूपीसीएल के आकलन के अनुसार वर्ष 2030-31 तक राज्य में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ सकता है। अनुमान है कि अलग-अलग महीनों में करीब 446 मेगावाट से लेकर 1311 मेगावाट तक बिजली की कमी सामने आ सकती है। ऐसे में प्रस्तावित 1320 मेगावाट की आपूर्ति शुरू होने के बाद राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद मिलेगी। राज्य गठन के बाद यह पहली बड़ी कोल आधारित बिजली परियोजना होगी, जिसमें इतनी बड़ी क्षमता से सीधे बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था की जाएगी। इससे उत्तराखंड की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य में राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर और सरप्लस बनाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
हाइड्रो और सोलर के साथ थर्मल पर भी जोर
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा जलविद्युत परियोजनाओं पर निर्भर है। हालांकि नदियों में पानी का प्रवाह कम होने, सर्दियों में बर्फबारी और बरसात के दौरान सिल्ट जैसी परिस्थितियों का असर हाइड्रो पावर उत्पादन पर पड़ता है। वहीं सौर ऊर्जा का उत्पादन मुख्य रूप से दिन के समय ही संभव होता है। ऐसे में थर्मल पावर को बिजली के वैकल्पिक और अपेक्षाकृत स्थिर स्रोत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर पीक आवर के दौरान लगातार बिजली उपलब्ध कराने में यह परियोजना राज्य के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। यूपीसीएल की इस परियोजना को उत्तराखंड की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इसके शुरू होने के बाद राज्य को बिजली की कमी से राहत मिलने के साथ औद्योगिक और घरेलू उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।